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[[File:Subhas Chandra Bose (tokyo).JPG|thumb|200px|right|रैंकोजी मन्दिर टोकियो के परिसर में स्थापित नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की आवक्ष प्रतिमा]]
'''रैंकोजी मन्दिर''' ([[अंग्रेजी]]: Renkōji Temple, [[जापानी]]:蓮光寺|Renkōji) जापान के [[टोकियो]] में स्थित का एक बौद्ध मन्दिर है, जहाँ [[भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]] के अग्रिम सेनानी [[सुभाष चन्द्र बोस]] की अस्थियाँ आज भी सुरक्षित रखी हुई हैं।<!--कृपया यहाँ बदलाव करने से पहले इस लेख के वार्ता पृष्ठ पर चर्चा कर लें--> इस तथ्य की पुष्टि जी॰ डी॰ खोसला आयोग की रिपोर्ट में हो चुकी है। <ref name="ht1">{{cite web | url=http://www.hindustantimes.com/news/specials/netaji/khosla_find_11.htm | title=Ashes at Renkoji temple are Bose's ('''Highlights of G D Khosla Commission Report''') | date= | publisher = [[हिन्दुस्तान टाईम्स]] | language=अंग्रेजी | quote=From the evidence discussed above, I am convinced beyond all reasonable doubts that the wooden casket lodged in the Renkoji Temple at Tokyo contains Bose's ashes and these ashes were placed in the box at Taipei after the cremation of his dead body | accessdate=8 नवम्बर 2013}}</ref> <ref name="krant1">{{cite book | last1=क्रान्त | first1=मदनलाल वर्मा | authorlink1= | last2= | first2= | editor1-first= | editor1-last= | editor1-link= | others= | title=स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास |url=http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 | format= | accessdate= | edition=1 | series= | volume=2 | date= | year=2006 | month= | origyear= | publisher=प्रवीण प्रकाशन | location=नई दिल्ली | language=Hindi | isbn= 81-7783-120-8 | oclc= | doi= | id= | page=513 | pages= | chapter= | chapterurl= | quote=23 अगस्त 1945 को टोकियो रेडियो ने बताया कि सैगोन में नेताजी एक बड़े बमवर्षक विमान से आ रहे थे कि 18 अगस्त को ताइहोकू हवाई अड्डे के पास उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में उनके साथ सवार जापानी जनरल शोदेई, पायलेट तथा कुछ अन्य लोग मारे गये। नेताजी गम्भीर रूप से जल गये थे। उन्हें ताइहोकू सैनिक अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया। कर्नल हबीबुर्रहमान के अनुसार उनका अन्तिम संस्कार ताइहोकू में ही कर दिया गया। सितम्बर के मध्य में उनकी अस्थियाँ संचित करके टोकियो के रैंकोजी मन्दिर में रख दी गयीं । |ref= | bibcode= | laysummary= | laydate= | separator= | postscript= | lastauthoramp= }}</ref> 1594 में स्थापित यह मन्दिर बौद्ध स्थापत्य कला का दर्शनीय स्थल है। जापान में रह रहे भारतीय यहाँ प्रति वर्ष 18 सितम्बर को नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का बलिदान दिवस मनाते हैं। दरअसल 18 सितम्बर 1945 को उनकी अस्थियाँ इस मन्दिर में रखी गयीं थीं। प्राप्त दस्तावेज़ के अनुसार नेताजी की मृत्यु तो एक माह पूर्व 18 अगस्त 1945 को ताइहोकू के सैनिक अस्पताल में रात्रि 21.00 बजे हो गयी थी।<ref name="krant2">{{cite book |last1=क्रान्त|first1=मदनलाल वर्मा |authorlink1= |last2= |first2= |editor1-first= |editor1-last= |editor1-link= |others= |title=स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास |url=http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 |format= |accessdate= |edition=1 |series= |volume=3 |date= |year=2006 |month= |origyear= |publisher=प्रवीण प्रकाशन |location=नई दिल्ली |language=Hindi |isbn= 81-7783-121-6|oclc= |doi= |id= |page=846 |pages= |chapter= |chapterurl= |quote=Ten minutes after the accident he was taken to the Army Hosptal in Taihoku and received treatment at 15.00. His death came at 21.00. His aide H.R. was also burned on neck, right cheak, both arms and right leg. Lt. Gen. SHIDEI met an instantaneous death inside the plane (two others died likewise).|ref= |bibcode= |laysummary= |laydate= |separator= |postscript= |lastauthoramp=}}</ref>
 
 
==इतिहास==
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