"ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस" के अवतरणों में अंतर

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प्राइस ने समान रूप से ओयूपी को इसके खुद के अधिकार में प्रकाशन की तरफ स्थानांतरित किया. 1863 में पार्कर के साथ प्रेस का रिश्ता खत्म हो गया और 1870 में कुछ बाइबल रचनाओं के लिए लन्दन में एक छोटे से जिल्दसाजीखाना को ख़रीदा गया.<ref> सटक्लिफ पीपी 16, 19. 37</ref> मैकमिलन का अनुबंध 1880 में समाप्त हो गया और उसे फिर से नवीकृत नहीं किया गया. इस समय तक, लन्दन के पैटर्नोस्टर रो में बाइबल के भण्डारण के लिए ऑक्सफोर्ड का एक गोदाम भी था और 1880 में इसके प्रबंधक हेनरी फ्राउड को विश्वविद्यालय के प्रकाशक का औपचारिक ख़िताब दिया गया. फ्राउड को पुस्तक व्यापार से न कि विश्वविद्यालय से फायदा हुआ और वे कई लोगों के लिए एक पहेली बनकर रह गए. ऑक्सफोर्ड के स्टाफ मैगजीन "द क्लेयरेंडनियन" के एक मृत्युलेख के अनुसार "यहाँ ऑक्सफोर्ड में हममें से कुछ लोगों के पास ही उनका व्यक्तिगत ज्ञान था".<ref> दी क्लेयरेंडूनियन, 4, संख्या 32, 1927, पी. 47</ref> उसके बावजूद, व्यवसाय में पुस्तकों की नई लाइनों को शामिल करके, 1881 में [[नया नियम|न्यू टेस्टामेंट]] के संशोधित संस्करण के विशाल प्रकाशन की अध्यक्षता करके<ref> सटक्लिफ पीपी. 48-53</ref> और 1896 में ब्रिटेन के बाहर [[नया यॉर्क|न्यूयॉर्क]] में प्रेस का पहला कार्यालय स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर फ्राउड ओयूपी के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण बन गए.<ref> सटक्लिफ पीपी. 89-91</ref>
 
प्राइस ने ओयूपी को रूपांतरित किया. 1884 में जब वे सचिव के पद से रिटायर हुए तब डेलीगेटों ने व्यवसाय के अंतिम शेयरों को वापस खरीद लिया.<ref> सटक्लिफ पी. 64</ref> पेपर मिल, छापेखाने, जिल्दखाना और गोदाम सहित प्रेस पर अब पूरी तरह से विश्वविद्यालय का स्वामित्व था. स्कूली किताबों और आधुनिक विद्वानों के ग्रंथों जैसे [[जेम्स क्लर्क माक्सवेल|जेम्स क्लेर्क मैक्सवेल]] के [[मैक्सवेल के समीकरण|''ए ट्रीटाइज़ ऑन इलेक्ट्रिसिटी एण्ड मैग्नेटिज्म'']] (1873) के शामिल होने से इसका उत्पादन बढ़ गया था जो [[ऐल्बर्टअल्बर्ट आइनस्टाइनआइंस्टीन|आइंस्टीन]] के विचार का मूल सिद्धांत साबित हुआ.<ref> बार्कर पी. 48</ref> इसकी परंपरा और कार्य की गुणवत्ता को छोड़े बिना इसे सरलतापूर्वक स्थापित करके प्राइस ने ओयूपी को एक सतर्क और आधुनिक प्रकाशक के रूप में परिवर्तित करना शुरू कर दिया. 1879 में उन्होंने प्रकाशन का काम भी अपने हाथ में ले लिया जिसके फलस्वरूप वह प्रक्रिया अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई अर्थात् विशाल परियोजना का आगमन हुआ जो ''ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी'' (ओईडी) बना.<ref> सटक्लिफ पीपी. 53-8</ref>
 
जेम्स मुर्रे और फिलोलॉजिकल सोसाइटी द्वारा ऑक्सफोर्ड को प्रदान किया गया "न्यू इंगलिश डिक्शनरी" एक शानदार शैक्षिक और देशभक्ति का काम था. लंबी बातचीत के फलस्वरूप एक औपचारिक अनुबंध की स्थापना हुई. मुर्रे को एक रचना को सम्पादित करना था जिसमें लगभग 10 साल का समय लगने वाला था और जिसकी लागत लगभग 9000 पाउंड थी.<ref> सटक्लिफ पीपी. 56-7</ref> दोनों आंकड़े बहुत ज्यादा आशावादी लग रहे थे. यह डिक्शनरी 1884 में मुद्रित रूप में दिखाई देने लगी लेकिन पहला संस्करण मुर्रे की मौत के 13 साल बाद 1928 तक पूरा नहीं हुआ जिसकी लागत लगभग 375000 पाउंड थी.<ref> साइमन विनचेस्टर, ''दी मीनिंग ऑफ एवरीथिंग - दी स्टोरी ऑफ़ दी ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी'' (ऑक्सफोर्ड, 2003)</ref> यह विशाल वित्तीय बोझ और इसके निहितार्थ प्राइस के उत्तरिधिकारियों के कंधे पर आ गया.