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==अस्थियों पर विवाद ==
[[जर्मनी]] में अपने पति के साथ रह रही नेताजीसुभाष की पुत्री अनिता बोस फाफ को यह विश्वास है कि उनके पिता की मृत्यु ताईपेन्ह में ही हुई थी और रैंकोजी मन्दिर में रखी अस्थियाँ उनके पिता की ही हैं।<ref>{{cite web|url=http://zeenews.india.com/news/nation/netaji-s-ashes-should-be-immersed-in-river-ganges-wishes-daughter_826629.html |title=Netaji's ashes should be immersed in River Ganges, wishes daughter |trans_title=नेताजी की अस्थियाँ गंगा नदी में विसर्जित की जायँ - पुत्री की इच्छा |date= 03 फरवरी, 2013 |publisher=[[जी न्यूज]] इण्डिया डॉट कॉम|language=अंग्रेजी|quote=Anita Bose Pfaff, said on Saturday that she was fairly convinced that her father had died in the unfortunate plane crash. “The most likely cause of Netaji’s death was the plane crash. That is more or less a consistent story beyond just mere speculation. Yes, I am fairly convinced that he died in the plane crash.” |accessdate=17 अक्तूबर 2013}}</ref> मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट पर बुद्धिजीवियों का यह तर्क है कि सुभाष की नीति दुश्मन के दुश्मन को दोस्त बनाने की थी। उनकी मृत्यु विमान दुर्घटना में ही हुई थी जिसके लिये वे भूतपूर्व ब्रिटिश खुफ़िया अफ़सर का हवाला देते हैं जिसने कहा था कि यदि उसे सुभाष जिन्दा मिल जाता तो वह उसे मौत की सजा अवश्य दिलाता।<ref>{{cite web|url=http://www.theguardian.com/world/2006/may/18/india.randeepramesh |title=Fate of Indian war leader thrown into doubt by new report |date=18 मई 2006 |publisher=द गार्जियन|language=अंग्रेजी|quote=Academics have argued that Bose disagreed with the arguments of racial superiority espoused by Japan and the Nazis. Most paint Bose as a pragmatist who considered an enemy's enemy a friend. He was a very clever man and a good bloke. I had a lot of time for him,"Hugh Toye, the former British intelligence officer whose job it was to track down Bose, told the Guardian. "If we had caught him he would have been sentenced to death though. I still think he died in the plane crash.|accessdate=8 नवम्बर 2013}}</ref> परन्तु भारत में रह रहे कुछ लोगों का ऐसा भी मानना हैथा कि [[फैजाबाद]] में नेताजीबोस वेश बदलकर गुमनामी बाबा के रूप में काफी लम्बे समय तक रहे और वहीं उनकी मृत्यु हुई।<ref name= "nbt1"> {{cite web|url=http://navbharattimes.indiatimes.com/lucknow/other-news/allahabad-high-court-seeks-probe-into-identity-of-man-believed-to-have-been-netaji/articleshow/18282887.cms |title=नेताजी सुभाष चंद्र बोस समझे जाने वाले गुमनामी बाबा की पहचान ढूंढी जाए: हाई कोर्ट|date=1 फरवरी, 2013|publisher=[[नवभारत टाइम्स]]|quote=इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और फैजाबाद के गुमनामी बाबा के रहस्य को सुलझाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने गुरुवार को आदेश दिया कि फैजाबाद के गुमनामी बाबा की असल पहचान तलाशी जाए।|accessdate=17 अक्तूबर 2013}}</ref> [[कोलकाता]] की एक इतिहासकार ने सन् 1945 के बाद नेताजी के [[रूस]] में होने की खबर का हवाला देते हुए भारत सरकार से उन सभी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने की माँग की गयी है जो जोसेफ स्टालिन की पुत्री स्वेतलाना ने [[भारत सरकार]] के गृह मन्त्रालय को सौंपी थीं। <ref>{{cite web|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-01-21/kolkata/36462512_1_taihoku-air-crash-renkoji-temple-justice-mukherjee-commission |title=Demand for Netaji's files to be made public |date=21 जनवरी 2013|publisher=[[टाइम्स ऑफ इण्डिया]], [[कोलकाता]]|quote= India government to approach the Russian government to get details of the files related to Netaji which were with KGB. Even she mentioned that Jospeh Stalinas daughter Svetlana even during her visit to India had given important information on Netaji and had hinted at Netajias presence in Russia after 1945. So she demanded that the documents submitted to Indian government by Svetlana be made public.|accessdate=8 नवम्बर 2013}}</ref>
 
[[हिन्दू धर्म]] में कोई व्यक्ति जब मरता है तो दाह संस्कार करने के बाद उसकी अस्थियों को किसी पवित्र नदी या गंगा सागर में विसर्जित करने की परम्परा है। इसके साथ यह मान्यता भी है कि यदि कोई हिन्दू किसी ऐसे स्थान पर मरे जहाँ आस पास कोई भारतीय नदी न हो तो उसकी अस्थियों को किसी पोटली में बाँधकर या तो [[पीपल]] के वृक्ष की किसी शाखा पर लटका दिया जाता है या फिर पास के ही किसी मन्दिर में रख दिया जाता है। उसके बाद उसके परिवार के लोग उन अस्थियों को अपनी सुविधानुसार [[गंगा]] या अन्य किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देते हैं। परन्तु नेताजी के अस्थि-कलश के साथ ऐसा भी नहीं हुआ। उनकी मृत्यु विमान दुर्घटना में हुई अथवा नहीं हुई इस पर विवाद पैदा कर दिया गया। भारत सन् 1947 में आज़ाद हो गया। तब से लेकर आज तक इस विवाद की जाँच के लिये तीन-तीन आयोग बैठाये गये। पहले शाहनवाज़ आयोग, फिर खोसला आयोग<ref name="ht1">{{cite web | url=http://www.hindustantimes.com/news/specials/netaji/khosla_find_11.htm | title=Ashes at Renkoji temple are Bose's ('''Highlights of G D Khosla Commission Report''') | date= | publisher = [[हिन्दुस्तान टाईम्स]] | language=अंग्रेजी | quote=From the evidence discussed above, I am convinced beyond all reasonable doubts that the wooden casket lodged in the Renkoji Temple at Tokyo contains Bose's ashes and these ashes were placed in the box at Taipei after the cremation of his dead body | accessdate=17 November 2013}}</ref> और सबसे अन्त में मुखर्जी आयोग ने इसकी जाँच की, परन्तु परिणाम कुछ नहीं निकला। 8 नवम्बर 2005 को जस्टिस मुखर्जी आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। 17 मई 2006 को संसद में इस पर खूब बहस हुई और बताया गया कि नेताजी की मौत विमान दुर्घटना में नहीं हुई। साथ ही यह भी कहा गया कि रैंकोजी मन्दिर में रखी जिन अस्थियों का सम्बन्ध सुभाषचन्द्र बोस से बतलाया जाता है वे उनकी नहीं हैं। बाद में भारत सरकार ने मुखर्जी आयोग की वह रिपोर्ट खारिज कर दी।
 
==विवाद का हल==
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