"जड़ (वनस्पति)": अवतरणों में अंतर

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मूल के प्रकार उसकी आकृति और शाखनविधि पर निर्भर करते हैं। जब केंद्रीय अक्ष बिना विभक्त गावदुम रूप में गहरा भूमिगत होता है, तब उससे मूसला जड़ (tap root) बनती है। इस प्रकार की जड़ कभी कभी छोटी होती है और खाद्य पदार्थो से भरी रहने के कारण फूली रहती है, जैसे गाजर की शंक्वाकार (fusiform) तथा शलजम की कुंभीरूप (napiform) मूल। एक बीजपत्री पौधों में प्राथमिक अक्ष शीघ्र ही नष्ट हो जाता है और उसका स्थान द्वितीयक अक्ष ले लेता है। जब अवरोही अक्ष बहुत छोटा होता है। और छोटे छोटे पतले तथा समान तंतुओं (moniliform) मूल कहते हैं। जब तंतुक (fibrii) माटे तथा रसदार होते हैं, तो ऐसा मूल पूलिकित (fasciculate) कहलाता है। इन मूलों के अतिरिक्त ग्रंथिल (palmately tubercular) मूल भी होते हें।
कुछ जडे जमीन से बाहर होती है
 
== संदर्भ ग्रन्थ ==
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