"गुजरी महल" के अवतरणों में अंतर

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सम्पादन सारांश रहित
'''विरासत : सुनने की फुर्सतफ़ुर्सत हो तो, आवाज़ है पत्थरों में...
 
'''लेखिका : फ़िरदौस ख़ान'''''
क़ाबिले-गौर है कि हिसार को फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ के वक्त से हिसार कहा जाने लगा, क्योंकि उसने यहां हिसार-ए-फ़िरोज़ा नामक क़िला बनवाया था। 'हिसार' फ़ारसी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है 'क़िला'। इससे पहले इस जगह को 'इसुयार' कहा जाता था। अब गूजरी महल खंडहर हो चुका है। इसके बारे में अब शायद यही कहा जा सकता है-
 
''सुनने की फुर्सतफ़ुर्सत हो तो आवाज़ है पत्थरों में,
''उजड़ी हुई बस्तियों में आबादियां बोलती हैं...''''
 
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