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[[चित्र:Amfm3-en-deSwling.gifpng|right|thumb|300px|विद्युतकुछ संकेतपुराने कारेडियो AM और FM मॉडुलेशन(रिसिवर)]]
24 दिसंबर 1906 की शाम कनाडाई [[वैज्ञानिक]] [[रेगिनाल्ड फेसेंडेन]] ने जब अपना वॉयलिन बजाया और [[अटलांटिक महासागर]] में तैर रहे तमाम [[जहाज|जहाजों]] के '''रेडियो''' ऑपरेटरों ने उस संगीत को अपने रेडियो सेट पर सुना, वह दुनिया में रेडियो प्रसारण की शुरुआत थी।
 
 
== पहला रेडियो स्टेशन ==
[[चित्र:Amfm3-en-de.gif|right|thumb|300px|विद्युत संकेत का AM और FM मॉडुलेशन]]
 
* 1918 में ली द फोरेस्ट ने [[न्यू यॉर्क]] के हाईब्रिज इलाके में दुनिया का पहला रेडियो स्टेशन शुरु किया। पर कुछ दिनों बाद ही [[पुलिस]] को ख़बर लग गई और रेडियो स्टेशन बंद करा दिया गया।
* नवंबर 1941 को सुभाष चंद्र बोस ने रेडियो [[जर्मनी]] से भारतवासियों को संबोधित किया
 
* 1927 तक भारत में भी ढेरों रेडियो क्लबों की स्थापना हो चुकी थी। 1936 में भारत में सरकारी ‘इम्पेरियल रेडियो ऑफ इंडिया’ की शुरुआत हुई जो आज़ादी के बाद [[ऑल इंडिया रेडियो]] या [[आकाशवाणी]] बन गया।
* 1939 में [[द्वितीय विश्व युद्धविश्वयुद्ध]] की शुरुआत होने पर भारत में भी रेडियो के सारे लाइसेंस रद्द कर दिए गए और [[ट्रांसमीटर|ट्रांसमीटरों]] को [[सरकार]] के पास जमा करने के आदेश दे दिए गए।
* [[नरीमन प्रिंटर]] उन दिनों बॉम्बे टेक्निकल इंस्टीट्यूट बायकुला के प्रिंसिपल थे। उन्होंने रेडियो इंजीनियरिंग की शिक्षा पाई थी। लाइसेंस रद्द होने की ख़बर सुनते ही उन्होंने अपने रेडियो ट्रांसमीटर को खोल दिया और उसके पुर्जे अलग अलग जगह पर छुपा दिए।
* इस बीच [[महात्मा गाँधी|गांधी जी]] ने अंग्रेज़ों भारत छोडो का नारा दिया। गांधी जी समेत तमाम नेता 9 अगस्त 1942 को गिरफ़्तार कर लिए गए और प्रेस पर पाबंदी लगा दी गई।
* [[कांग्रेस]] के कुछ नेताओं के अनुरोध पर नरीमन प्रिंटर ने अपने ट्रांसमीटर के पुर्जे फिर से एकजुट किया। माइक जैसे कुछ सामान की कमी थी जो शिकागो रेडियो के मालिक नानक मोटवानी की दुकान से मिल गई और मुंबई के चौपाटी इलाक़े के सी व्यू बिल्डिंग से 27 अगस्त 1942 को नेशनल कांग्रेस रेडियो का प्रसारण शुरु हो गया।
 
== पहला प्रसारण ==
 
* अपने पहले प्रसारण में उद्घोषक [[उषा मेहता]] ने कहा, “41.78 मीटर पर एक अंजान जगह से यह नेशनल कांग्रेस रेडियो है।”
* रेडियो पर विज्ञापन की शुरुआत 1923 में हुईहुई।
* इसके बाद इसी रेडियो स्टेशन ने गांधी जी का भारत छोडो का संदेश, [[मेरठ]] में 300 सैनिकों के मारे जाने की ख़बर, कुछ महिलाओं के साथ अंग्रेज़ों के दुराचार जैसी ख़बरों का प्रसारण किया जिसे समाचारपत्रों में सेंसर के कारण प्रकाशित नहीं किया गया था।
* पहला ट्रांसमीटर 10 किलोवाट का था जिसे शीघ्र ही नरीमन प्रिंटर ने और सामान जोडकर सौ किलोवाट का कर दिया। अंग्रेज़ पुलिस की नज़र से बचने के लिए ट्रांसमीटर को तीन महीने के भीतर ही सात अलग अलग स्थानों पर ले जाया गया।
* 12 नवंबर 1942 को नरीमन प्रिंटर और उषा मेहता को गिरफ़्तार कर लिया गया और नेशनल कांग्रेस रेडियो की कहानी यहीं ख़त्म हो गई।
* नवंबर 1941 में रेडियो जर्मनी से नेताजी [[सुभाष चंद्र बोस]] का भारतीयों के नाम संदेश भारत में रेडियो के इतिहास में एक और प्रसिद्ध दिन रहा जब नेताजी ने कहा था, “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा।”
* इसके बाद 1942 में आज़ाद हिंद रेडियो की स्थापना हुई जो पहले [[जर्मनी]] से फिर [[सिंगापुर]] और [[रंगून]] से भारतीयों के लिये समाचार प्रसारित करता रहा।
 
== आज़ादी के बाद ==
 
* आज़ादी के बाद अब तक भारत में रेडियो का इतिहास सरकारी ही रहा है।
* आज़ादी के बाद भारत में रेडियो सरकारी नियंत्रण में रहारहा।
* सरकारी संरक्षण में रेडियो का काफी प्रसार हुआ। 1947 में आकाशवाणी के पास छह रेडियो स्टेशन थे और उसकी पहुंच 11 प्रतिशत लोगों तक ही थी। आज आकाशवाणी के पास 223 रेडियो स्टेशन हैं और उसकी पहुंच 99.1 फ़ीसदी भारतीयों तक है।
* टेलीविज़न के आगमन के बाद शहरों में रेडियो के श्रोता कम होते गए, पर एफएम रेडियो के आगमन के बाद अब शहरों में भी रेडियो के श्रोता बढने लगे हैं। पर गैरसरकारी रेडियो में अब भी समाचार या समसामयिक विषयों की चर्चा पर पाबंदी है।