"समर्थ रामदास" के अवतरणों में अंतर

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प्रतिवर्ष समर्थ रामदास स्वामी के भक्त भारत के विभिन्न प्रांतों में 2 माह का दौरा निकालते हैं और दौरे में मिली भिक्षा से सज्जनगढ़ की व्यवस्था चलती है।
==व्यक्तित्व==
समर्थ जी का व्यक्तित्व भक्ति ज्ञान वैराग्य से ओतप्रोत था । मुखमण्डलपर दाढ़ी तथा मस्तकपर जटाएं ,भालप्रदेश पर चन्दन का टिका रहता था । उनके कंधेपर भिक्षा के लिए झोली रहती थी । एक हाथ में जपमाला और कमण्डलु तथा दूसरे हाथ में योगदण्ड (कुबड़ी ) होती थी । योगशास्त्र के अनुसार उनकी भूचरी मुद्रा थी । मुखमें सदैव रामनाम का जाप चलता था ।आपऔर बहुत कम बोलते थे ।पैरोंमें लकड़ी कि पादुकाए धारण करते थे । आप प्रतिदिन १२०० सूर्यनमस्कार लगाते थे इस कारण शरीर अत्यंत बलवान था ।ऐसा समकालीन ग्रंथमें उल्लेख है ।
 
==ग्रन्थरचना==
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