"सिद्धान्त शिरोमणि" के अवतरणों में अंतर

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इसके चार भाग हैं:
 
१) '''[[लीलावती]]''' - इसमें [[अंकगणित]] (मैथेमेटिक्स) का विवेचन किया गया है।
 
२) '''बीजगणित''' - इसमें बीजगणित (अल्जेब्रा) का विवेचन है।
वे पुनः कहते हैं-
 
:आकृष्टिशक्तिश्च महि तय यत्
:खष्ठं गुरु स्वभिमुखं स्वशक्त्या
 
:आकृष्यते तत्पततीव भाति
खष्ठं गुरु स्वभिमुखं स्वशक्त्या ।
:समेसमन्तात् क्व पतत्वियं खे ॥
 
आकृष्यते तत्पततीव भाति
 
समेसमन्तात् क्व पतत्वियं खे ॥
 
—(सिद्धान्त शिरोमणि गोलाध्यय-भुवनकोष-६)
Bhaskaracharya says that what we see is not always the truth. He says that if you draw a large circle and look at only a hundredth part of its circumference, then it will appear to be a straight line; but actually it is not so. It is curved. Similarly, we see only a small part of the sphere of this huge earth. Hence, it seems flat to us. In reality, the earth-is round.
 
:समो यत: स्यात्परिधेह शतान्श:
:पृथी च पृथ्वी नितरां तनीयान्
 
पृथी च पृथ्वी नितरां तनीयान् ।
 
नरश्च तत्पृष्ठगतस्य कृत्स्ना
 
:नरश्च तत्पृष्ठगतस्य कृत्स्ना
:समेव तस्य प्रतिभात्यत: सा ॥
 
—(सिद्धान्त शिरोमणि गोलाध्यय-भुवनकोष- १३)