"विष्णु" के अवतरणों में अंतर

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विष्णु के दस मुख्य [[अवतार]] मान्यता प्राप्त हैं। यह निम्न हैं:
 
# '''[[मत्स्य अवतार]]''' : tota मत्स्य (मछ्ली) के अवतार में प्रलय के समय भगवान विष्णु ने एकसत्यव्रत ऋषिनामक [[मनु]] को सब प्रकार के जीव-जन्तु एकत्रित करने के लिये कहा एक राक्षस ने जब वेदों को चुरा कर सागर में छुपा दिया, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण करके वेदों को प्राप्त किया और उन्हेंप्रलय पुनःसे स्थापितरक्षण किया।
एक राक्षस ने जब वेदों को चुरा कर सागर में छुपा दिया, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण करके वेदों को प्राप्त किया और उन्हें पुनः स्थापित किया।
# '''[[कूर्म अवतार]]''' : कूर्म के अवतार (कच्छपावतार) में भगवान विष्णु ने क्षीरसागर केसमुद्र समुद्रमंथनमंथन के समय मंदर पर्वत को अपने कवच पर संभाला था। इस प्रकार भगवान विष्णु, मंदर पर्वत और वासुकि नामक सर्प की सहायता से देवों एंव असुरों ने [[समुद्र मंथन]] करके [[चौदह रत्नों]]की प्राप्ती की। (इस समय भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप भी धारण किया था।)
# '''[[वराहावतार]]''' : वराह के अवतार में भगवान विष्णु ने महासागर में जाकर हिरण्याक्ष नामक असुर से भूमि देवी कि रक्षा की थी, जोराक्षस उन्हें महासागर की तह में पँहुचले गयींगया थीं।था। एक मान्यता के अनुसार इस रूप में भगवान ने हिरण्याक्ष नामक राक्षस का वध भी किया था।
# '''[[नरसिंहावतार]]''' : नरसिंह रूप में भगवान विष्णु ने अपने भक्त [[प्रहलाद]] की रक्षा की थी और उसकेपिता हिरण्यकश्यप (हिरण्याक्ष का भाई) का वध किया था। इस अवतार से भगवान के निर्गुण होने की विद्या प्राप्त होती है।
# '''[[वामनावतार|वामन् अवतार]]''' : इसमें विष्णु जी वामन् (बौने) के रूप में प्रकट हुए। भक्त प्रह्लादके पौत्र, असुरराज राज बलि सेको देवतओंसद्गति प्रदान की रक्षा के लिए भगवान ने वामन अवतार धारण किया।थी।
# '''[[परशुराम अवतार]]''': इसमें विष्णु जी ने परशुराम के रूप में असुरों का संहार किया।
# '''[[राम अवतार]]''': राम ने रावण का वध किया जो [[रामायण]] में वर्णित है।
# '''[[कृष्णावतार]]''' : श्रीकृष्ण ने [[देवकी]] और [[वसुदेव]] के घर जन्म लिया था। उनका लालन पालन [[यशोदा]] और [[नंद]] ने किया था।.प्रभु नें [[कंस]] नामक अत्याचारी राजा जो कृष्ण के मामा थे, उसका संहार किया। इस अवतार का विस्तृत वर्णन [[भागवत पुराण|श्रीमद्भागवत पुराण]] में मिलता है। इस अवतार में विष्णु ने अपना विराट स्वरूप/विश्वरूप धारण किया था।और [[अर्जुन]] को गीता का ज्ञान दिया।
# '''[[बुद्ध अवतार]]''': इसमें विष्णुजी [[बुद्ध]] के रूप में लोगों को मोक्ष मार्ग(जन्म मरण के चक्र से मुक्ति का मार्ग) चार आर्य सत्य के रूप में धर्म चक्र की देशना की। इसी के साथ बौद्ध धर्म का उदय हुआ।
# '''[[कल्कि अवतार]]''': इसमें विष्णुजी भविष्य में कलियुग के अंत में आयेंगे।
 
सारा जगत ही इनका अवतार है इनके विराट स्वरूप में सब शामिल हैं। विष्णुसहस्त्रनाम स्तोत्र में इनके नामों का वर्णन है।
 
==चतुर्भज स्वरूप==
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