"चतुर्थ कल्प" के अवतरणों में अंतर

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[[तृतीय कल्प]] (Tertiary period) के अंतिम चरण में पृथ्वी पर अनेक भौगोलिक एवं भौमिकीय परिवर्तन मिलते हैं, जिनसे एक नए युग का प्रादुर्भाव होना निश्चित हो जाता है। इन्हीं परिवर्तनों के आधार पर डेसनोआर ने 1829 ई. में '''चतुर्थ कल्प''' (Quarternary age) की कल्पना की। यद्यपि अब भूशास्त्रवेत्ताओं का मत है कि इस नवीन कल्प को तृतीय कल्प से पृथक्‌ नहीं किया जा सकता है, फिर भी दो मुख्य कारणों से इस काल को अलग रखना उचित नहीं हागा। इनमें से एक है इस समय में हुआ मानव जाति का विकास और दूसरा इस काल की विचित्र जलवायु।
 
चतुर्थ कल्प का प्रारंभ तृतीय कल्प के [[अतिनूतन युग ]] (प्लायोसीन/ (Pliocene) युग के बाद होता है। इसके अंतर्गत दो युग आते हैं : एक प्राचीन, जिसे प्लायस्टोसीन (Pleistocene) कहते हैं, और दूसरा आधुनिक, जिसे [[नूतन युग]] (Recent) कहते हैं। प्लायस्टोसीन नाम सर चार्ल्स लायल ने सन्‌ 1839 ई. में दिया था।
*एक प्राचीन युग, जिसे '''[[अत्यंतनूतन युग]]''' (प्लायस्टोसीन / Pleistocene) कहते हैं, और
*दूसरा आधुनिक युग, जिसे '''[[नूतनतम युग]]''' (होलोसीन / Holocene) कहते हैं।
 
'प्लायस्टोसीन' नाम सर चार्ल्स लायल ने सन्‌ 1839 ई. में दिया था।
 
== विस्तार ==