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जब कैनेडी 1960 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे थे तब उनका मुख्य मुद्दा था कथित रूप से अग्रणी रूस से "मिसाइल का अंतर". जबकि दरअसल, संयुक्त राज्य अमेरिका सोवियत संघ से आगे था. 1961 में, सोवियत संघ के पास सिर्फ चार अंतरमहाद्वीपीय प्राक्षेपिक मिसाइलें (ICBMs) थीं. अक्टूबर 1962 तक, उनके पास कुछ दर्जन भर होंगी, हालांकि कुछ खुफिया के अनुमान के अनुसार अधिक से अधिक 75 होंगी.<ref name="afmag" /> जबकि दूसरी ओर संयुक्त राज्य अमेरिका के पास 170 ICBMs थीं तथा उसने जल्द ही और भी बना लिया था. उसके पास आठ जॉर्ज वॉशिंगटन और एथान अलेन श्रेणी की प्राक्षेपिक मिसाइल पनडुब्बियां भी थीं, उनकी क्षमता {{convert|2200|km}} के रेंज के साथ प्रत्येक से 16 पोलारिस मिसाइलें छोड़ने की थी. ख्रुश्चेव ने मिसाइल अंतर की धारणा में वृद्धि की, जब उन्होंने जोर से दावा किया कि यूएसएसआर (USSR) "सौसेजेस जैसी" मिसाइलें बना रहा है, जिनकी संख्या और क्षमताएं वास्तविकता के करीब नहीं थीं. तथापि, सोवियत संघ के पास संख्या के हिसाब से मध्यम-दूरी की प्राक्षेपिक मिसाइलें जरुर थीं, लगभग 700.<ref name="afmag" /> 1970 में प्रकाशित अपने संस्मरण में ख्रुश्चेव ने लिखा था, "क्यूबा की रक्षा करने के अलावा, हमारी मिसाइलें बराबरी करने लगेंगी जिसे पश्चिम शक्ति संतुलन कहा करता है."<ref name="afmag" /><ref name="afmag" />
पचास साल पहले अक्तूबर 1962 में कैरेबियन संकट
सामने आया था। अमरीका और सोवियत संघ
परमाणविक युद्ध के कगार
पचास साल पहले अक्तूबर 1962 में कैरेबियन संकट
सामने आया था। अमरीका और सोवियत संघ
परमाणविक युद्ध के कगार पर पहुँच गए थे। सिर्फ़
अन्तिम क्षणों में ही इस युद्ध को टालना संभव
हो पाया। उसके बाद कभी दुनिया परमाणविक युद्ध के
इतना क़रीब नहीं पहुँची।
अमरीकी वैज्ञानिक संघ के रॉबर्ट नोर्रिस और हाँस
क्रिस्टेंसन ने बताया कि तब अमरीका को यह
नहीं पता था कि 24 अक्तूबर को उसने जब
क्यूबा को घेरा तो पाँच तरह के 158 परमाणविक रॉकेट
क्यूबा में तैनात थे। अभी तक यह नहीं पता है कि वे
छोड़े जाने के लिए तैयार थे या नहीं और उनका रूख
अमरीका की तरफ़ था या नहीं। उस समय
तो अमरीका को इसका ज़रा भी एहसास तक नहीं था।
अमरीकी सैन्य मुख्यालय क्यूबा में घुसपैठ करने और
इस घुसपैठ के दौरान परमाणु बम का उपयोग करने
की बात सोच रहा था। लेकिन फिर 31 अक्तूबर
को उसने यह विचार छोड़ दिया।
तब यूरोप में अमरीका के 500 परमाणविक रॉकेट तैनात
थे, जो सोवियत संघ के विभिन्न
इलाकों को अपना निशाना बना सकते थे। उधर सोवियत
संघ के ऐसे 550 रॉकेट तैयार खड़े थे जो यूरोप पर मार
करते।
कैरेबियन संकट के समय अमरीका और सोवियत संघ
दोनों ही देशों ने अपनी रणनीतिक परमाणु सेनाओं
को तैयार रहने का आदेश दे दिया था। इसका मतलब
था कि किसी भी समय अन्तर्महाद्वीपीय बैलिस्टिक
रॉकेटों, पनडुब्बियों पर लगे बैलिस्टिक रॉकेटों और सुदूर
हमला करने वाले बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल शुरू
हो सकता था।
 
== पूर्वी गुट रणनीति ==
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