"लघुगणक" के अवतरणों में अंतर

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जॉन नेपियर, हेनरी ब्रिग, जेम्य ग्रेगोरी, ऐब्राहम शार्प तथा अन्य गणितज्ञों ने भिन्न भिन्न पद्धतियों का उपयोग लघुगणक सारणी के निर्माण में किया है। निकोलस मर्केटर (Nicolas Mercator) ने 1668 ई. में लघु (1+य) की अनंत श्रेणी प्राप्त की :
 
: लघु (1+x) = x - (x^<sup>2</sup> / 2) + (x^<sup>3</sup> / 3) . . . (-1 < < 1)
 
संगणन में यह अधिक लाभप्रद नहीं है। 1695 ई. में जॉन वालिस ने निम्नलिखित अनंत श्रेणी का प्रयोग किया :
 
: (1/2) Log ( ( 1+x) / (1-x) ) = x + x^<sup>3</sup> / 3 + x^<sup>5</sup> / 5 + ...
 
इस श्रेणी की अभिसृति शीघ्रतर है। 1794 ई. में जी.एफ. भेगा द्वारा लिखित थिसॉरस (Thesaurus) में य = (2र>sup>2</sup>-1)<sup>-1</sup> मानकर श्रेणी की अभिसृति अधिक शीघ्रतर कर दी गई है।
 
साधारणत: सारणी के उपयोग में अनुपाती अंशसिद्धांत की सहायता ली जाती है।
 
==लघुगणकीय प्रवर्धक==
[[चित्र:LOG-Opamp.svg|right|thumb|300px|लघुगणकीय प्रवर्धक]]
सामने के चित्र में ऑप-ऐम्प का आउटपुट, इन्पुट संकेत के लघुगणक के स्मानुपाती होता है।
 
== लघुगणकों के उपयोग ==