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[[चित्र:Logarithms.png|thumb|300px| अलग-अलग आधार के लिये लघुगणकीय फलन का आरेखण: <span style="color:red">लाल रंग</span> वाला ''<span style="color:red">e</span>'', <span style="color:green">हरा रंग</span> वाला <span style="color:green">10</span>, तथा<span style="color:purple">बैगनी</span> वाला <span style="color:purple">1.7</span>. सभी आधारों के लघुगणक बिन्दु (1,&nbsp;0) से होकर गुजरते हैं क्योंकि किसी भी संख्या पर शून्य घातांक का मान 1 होता है।]]
 
[[स्कॉटलैंड]] निवासी [[नैपियर]] द्वारा प्रतिपादित '''लघुगणक''' (Logarithm / लॉगेरिथ्म) एक ऐसी गणितीय युक्ति है जिसके प्रयोग से गणनाओं को छोटा किया जा सकता है। इसके प्रयोग से गुणा और भाग जैसी जटिल प्रक्रियाओं को जोड़ और घटाने जैसी अपेक्षाकृत सरल क्रियाओं में बदल दिया जाता है।
 
[[गणित]] में किसी दिए हुए आधार पर किसी संख्या का '''लघुगणक''' वह संख्या होती है जिसको उस आधार के उपर [[घात (गणित)|घात]] लगाने से उसका मान दी हुई संख्या के बराबर हो जाय। उदाहरण के लिये, १० आधार पर १००००० (एक लाख) का लघुगणक ५ होगा क्योंकि आधार १० पर ५ घात लगाने से उसका मान १००००० हो जाता है।
अर्थात किसी संख्या ''x'', आधार ''b'' और घातांक ''n'', के लिये
 
: <math>\mbox{if}~~log_b b^nx = x, ~~n\mbox{then}~~ Leftrightarrow\log_b (x) = b^n. \,</math>
 
यह परिभाषा तभी वैध है जब आधार ''b'' , 1 के अलावा कोई अन्य धनात्मक वास्तविक संख्या हो, अर्थात् ''b''> 0 y ''b'' ≠ 1, ''x'' कोई भी धनात्मक वास्तविक संख्या हो ( ''x'' > 0 ) तथा ''n'' कोई भी वास्तविक संख्या हो (''n'' ∈ '''R''') ।
प्रत्येक लघुगणक का आधार होना आवश्यक है। भिन्न भिन्न आधारों के लिए एक ही संख्या के भिन्न भिन्न लघुगणक होते हैं।
साधारणत: आधार के लिए दो संख्याओं का व्यवहार होता है, जिनके अनुसार लघुगणक की दो प्रणालियाँ बनाई गई हैं।
 
प्रत्येक लघुगणक का आधार होना आवश्यक है। भिन्न भिन्न आधारों के लिए एक ही संख्या के भिन्न भिन्न लघुगणक होते हैं। साधारणत: आधार के लिए दो संख्याओं का व्यवहार होता है, जिनके अनुसार लघुगणक की दो प्रणालियाँ बनाई गई हैं।
प्राकृतिक प्रणाली में लघुगणक का आधार एक [[अपरिमेय संख्या]] e मानी जाती है। इसके आविष्कारक जॉन नेपियर के नाम पर ऐसे लघुगणकों को नेपिरीय लघुगणक भी कहते हैं। e का मान एक अनंत श्रेणी द्वारा व्यक्त होता है और लगभग 2.7182818...... के बराबर है। उच्च गणित के सैद्धांतिक कार्यों के लिए इसी प्रणाली का उपयोग होता है।
 
प्राकृतिक प्रणाली में लघुगणक का आधार एक [[अपरिमेय संख्या]] '''e''' मानी जाती है। इसके आविष्कारक [[जॉन नेपियर]] के नाम पर ऐसे लघुगणकों को 'नेपिरीय लघुगणक' भी कहते हैं। '''e''' का मान एक अनंत[[अनन्त श्रेणी]] द्वारा व्यक्त होता है और लगभग 2.7182818...... के बराबर है। उच्च गणित के सैद्धांतिक कार्यों के लिए इसी प्रणाली का उपयोग होता है।
दूसरी प्रणाली के आविष्कारक हेनरी ब्रिग हैं। इस प्रणाली में लघुगणक का आधार 10 है। इसे सामान्य प्रणाली (common logarithm) कहते हैं। यह व्यावहारिक प्रयोगों के लिए उपयुक्त है।
 
दूसरी प्रणाली के आविष्कारक [[हेनरी ब्रिग]] हैं। इस प्रणाली में लघुगणक का आधार '''10''' है। इसे सामान्य'साधारण प्रणालीलघुगणक' (common logarithm) कहते हैं। यह व्यावहारिक प्रयोगों के लिए उपयुक्त है।
 
== लघुगणकों के गुण ==
यदि किसी संख्या के लघुगणक के [[पूर्णांक]] भाग को पूर्णाश और दशमलव भाग को अपूर्णांश कहते हैं। उदाहरण के लिये log<sub>10</sub>(4576) = 3.66048 होता है। 3.66048 में 3 पूर्णांश और 0.66048 अपूर्णांश है।
 
किसी संख्या के लघुगणक का '''पूर्णांश ज्ञात करने का नियम''' निम्नलिखित है :
 
*(1) जिस धनात्मक संख्या (>1) के पूर्णांक भाग में म+1 अंक हो, उस संख्या के लघुगणक का पूर्णांश म होता है। जैसे २४५ के लघुगणक का पूर्णांश २ होगा क्योंकि २४५ में (२+१) अंक हैं। इसी प्रकार २४५.६७ का पूर्णांश भी २ ही होगा क्योंकि २४५.६७ के पूर्ण भाग में (२+१) अंक ही हैं।
 
*(2) जिस धनात्मक संख्या (<1) में दशमलव बिंदु के बाद '''म''' शून्य के बाद कोई अशून्य अंक आता हो, उसके लघुगणक का पूर्णांश - (म+1) होता है। जैसे 0.0034 में दशमलव के बाद दो शून्य आने के बाद ही अशून्य अंक (३) आ रहा है; इसलिये इसका पूर्णांश = -(२+१) = -३ (ऋण तीन) होगा।
 
'''अपूर्णांश ज्ञात करने का नियम''' निम्नलिखित हैं :
 
अपूर्णांश संख्या के मान और उसमें व्यवहृत अंकों के क्रम पर निर्भर करता है। यदि दो संख्याओं में एक ही प्रकार के अंक एक ही क्रम में व्यवहृत हों और केवल दशमलव बिंदु का स्थान भिन्न हो, तो उन संख्याओं के अपूर्णांश एक ही होंगे, क्योंकि अपूर्णांश संख्या में दशमलव बिंदु के स्थान पर निर्भर नहीं होता है। उदाहरण के लिये ४५३८ और ४५.३८ दोनो के अपूर्णांश समान होंगे यद्यपि दोनो के अपूर्णांश अलग-अलग (क्रमशः ३ तथा १ ) होंगे।
[[स्कॉटलैंड]] निवासी [[जॉन नेपियर]] तथा [[स्विट्जरलैंड]] के [[जूस्ट बुर्गी]] (Joost Burgi) ने स्वतंत्र रूप से लघुगणक का आविष्कार किया। इन दोनों के लघुगणक एक दूसरे से भिन्न थे तथा प्राकृतिक लघुगणक और सामान्य लघुगणक भी भिन्न थे। नेपियर का लघुगणक 1614 ई. में एड्नवर (Edinburgh) में ''मिरिफिसी लॉगेरिथमोरम केनोनिस डिसक्रिप्शियो (Mirifici logarithmorum canonis descriptio)'' शीर्षक के अंतर्गत प्रकाशित हुआ। 1620 ई. में प्रेग (Prague) में जूस्ट बुर्गी का लघुगणक ''अरिथमेटिशे उंडर ज्योमेट्रिशे प्रोग्रेस टेबूलेन (Arithmetische under Geometrische Progress Tabulen)'' शीर्षक के अंतर्गत प्रकाशित हुआ। इस समय तक सारे [[यूरोप]] में नेपियर के लघुगणक का प्रचार हो चुका था। उनके सिद्धांत एवं परिकलन पद्धति का पूर्ण उल्लेख, उनकी पुस्तक ''मिरिफ़िसी लॉगरिथमोरम केनोनिस कंस्ट्रक्सियो, (Mirifice logarithmorum canonis constructio)'' में मिलता है, जो उनकी मृत्यु के दो वर्ष पश्चात्‌ 1619 ई. में प्रकाशित हुई। डब्लू.आर. मैक्डॉनैल्ड (W.R. Macdonald) ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद 1889 ई. में किया। 1614 ई. के नेपिरियन लघुगणक तथा प्राकृतिक लघुगणक का पारस्परिक संबंध निम्न ढंग से व्यक्त किया जाता है :
 
: नेप लघु र = 10<sup>7</sup> लघु <sup>(10 / र)</sup>
 
नेपियर ने इकाई के लघुगणक का मान शून्य नहीं माना था। फलस्वरूप इनके सिद्धांत के अनुसार, बिना संशोधन के लधुगणक से संगत समीकरण '''ब<sup>ल</sup> = न''' संभव नहीं था।
जॉन वॉलिस (John Wallis) ने 1685 ई. तथा बेर्नूली ने 1694 ई. में लघुगणक से संगत समीकरण '''ब<sup>ल</sup> = न''' का अनुमान किया। इस विचार पर आधारित लघुगणक का उल्लेख 1742 ई. से मिलता है। इसका वर्णन ''गार्डिनर्स टेबुल्स ऑव लॉगैरिथम्स (Gardiners Tables of Logarithms)'' की भूमिका में मिलता है। इसका श्रेय विलियम जोम्स (William Jones) को दिया जाता है।
 
== सामान्यसाधारण लघुगणक (Common logarithm) ==
सामान्यसाधारण लघुगणक का विकास जॉन नेपियर और हेनरी ब्रिग के सम्मिलित प्रयास का फल है। इसका उल्लेख ब्रिग के 'ऐरिथमेटिका लॉगरिथमिका' (Arithmetica Logarithmica) में है।
 
यदि र [[वृत्त]] की त्रिज्या है, तो ब्रिग का सुझाव था कि लघु र = 0 और लघु = 10<sup>10</sup>। नेपियर के अनुसार लघु 1 = 0, लघु र = 10<sup>10</sup>। कुछ समय के पश्चात्‌ लघु र = 10<sup>10</sup> के स्थान पर लघु 10 = 1 का व्यवहार होना आरंभ हुआ। ब्रिग के 1624 ई. के प्रकाशन में 1 से 20,000 और 90,000 से 1,00,000 के लघुगणक का दशमलव के 14 स्थान तक का उल्लेख है। 20,000 से 90,000 के लघुगणक ऐड्रिऐन ब्लाक (Adrian Vlacq) द्वारा निकाले गए। ब्रिग की 1624 ई. की सारणी में कैरेक्टेरिस्टिक (characteristic) शब्द का उल्लेख है। 1693 ई. में जॉन वॉलिस ने अपनी बीजगणित की पुस्तक में मैंटिसा (mantissa) शब्द का प्रयोग किया है।
==लघुगणकीय प्रवर्धक==
[[चित्र:LOG-Opamp.svg|right|thumb|300px|लघुगणकीय प्रवर्धक]]
सामने के चित्र में ऑप-ऐम्प का आउटपुट, इन्पुटइनपुट संकेत के लघुगणक के स्मानुपातीसमानुपाती होता है। ऐसे [[प्रवर्धक]] का उपयोग वहाँ किया जाता है जहाँ इनपुट संकेत में परिवर्तन बहुत अधिक (कई [[परिणाम की कोटि]]) होता हो किन्तु आउटपुट में सीमित परिवर्तन चाहते हों।
 
== लघुगणकों के उपयोग ==
लघुगणक का प्रयोग ऐसे [[समीकरण|समीकरणों]] को हल करने के लिये किया जाता है जिनमें अग्ग्यात राशि घात के रूप में हो। चूँकि लघुगणकीय फलन का अवकलज बहुत सरल फलन होता है, इसलिये इनका उपयोग इन्टीग्रल निकालने में होता है। लघुगणक, [[घातांक]] (exponentials) तथा [[करणी]] (radicals) - ये तीनों आपस में बहुत घणिष्टता से जुड़े हुए हैं। समीकरण ''b''<sup>''n''</sup> = ''x'', में ''b'' का मान करणी द्वारा निकाला जा सकता है; ''n'' का मान लघुगणक द्वारा निकाला जा सकता है तथा ''x'' का मान घात द्वारा।
 
Logarithms are useful in solving equations in which exponents are unknown. They have simple [[derivative]]s, so they are often used in the solution of [[integral]]s. The logarithm is one of three closely related functions. In the equation ''b''<sup>''n''</sup> = ''x'', ''b'' can be determined with [[radical (mathematics)|radicals]], ''n'' with logarithms, and ''x'' with [[exponential function|exponentials]]. See [[List of logarithmic identities|logarithmic identities]] for several rules governing the logarithm functions.
 
=== विज्ञान ===
[[विज्ञान]] में बहुत सी राशियाँ दूसरी राशियों के लघुगणक के रूप में व्यक्त की जातीं हैं। इसकी अधिक विस्तृत सूची के लिये [[लघुगणकीय पैमाना]] देखें।
 
Various quantities in science are expressed as logarithms of other quantities; see [[logarithmic scale]] for an explanation and a more complete list.
 
* In [[chemistry]], the negative of the base-10 logarithm of the [[concentration]] of [[hydronium]] ions (H<sub>3</sub>O<sup>+</sup>, the form H<sup>+</sup> takes in water) is the measure known as [[pH]]. The concentration of hydronium ions in neutral [[water]] is 10<sup>−7</sup> mol/L at 25&nbsp;°C, hence a pH of 7.