मुख्य मेनू खोलें

बदलाव

छो
आतंरिक कड़ी सुधार
{{आज का आलेख}}
[[चित्र:geabios3d.jpg|framed|right|300px|डिजिटल एलिवेशन प्रतिरूप, मानचित्र, और वेक्टर डाटा]]
'''भौगोलिक सूचना तंत्र''' या '''भौगोलिक सूचना प्रणाली''' अथवा संक्षेप में जी॰आई॰एस॰, ([[अंग्रेज़ी]] [[:en:Geographic information system|Geographic information system]] कंप्यूटर [[हार्डवेयर]] और [[सॉफ्टवेयर]]<ref> डी आर खुल्लर - [http://books.google.co.in/books?id=WelOAgAAQBAJ&lpg=PA25&ots=SbQS87bC5H&dq=%22%E0%A4%AD%E0%A5%8C%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE%20%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%22&pg=PA25#v=onepage&q=%22%E0%A4%AD%E0%A5%8C%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE%20%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%22&f=false संक्षिप्त भूगोल]</ref> को [[स्थानिक डेटाबेस|भौगोलिक सूचना]] के साथ एकीकृत कर इनके लिए आंकड़े एकत्रण, प्रबंधन, विश्लेषण, संरक्षण और निरूपण की व्यवस्था करता है।<ref>[http://books.google.co.in/books?id=hsN6eqtw8UYC&lpg=SA24-PA17&ots=6E_WWvUpFV&dq=%22%E0%A4%AD%E0%A5%8C%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE%20%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%22&pg=SA24-PA17#v=onepage&q=%22%E0%A4%AD%E0%A5%8C%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE%20%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%22&f=false संक्षिप्त भूगोल] </ref><ref name="हिन्दुस्तान">[http://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/gyan/67-75-99870.html जी॰आई॰एस]।हिन्दुस्तान लाइव।१० मार्च, २०१०</ref>
 
इस प्रौद्योगिकी का प्रयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, संसाधन प्रबंधन (रिसोर्स मैनेजमेंट), संपत्ति प्रबंधन, पुरातात्त्विक कार्य, शहरीकरण व अपराध विज्ञान में होता है। उदाहरण के तौर पर (जी॰आई॰एस) के द्वारा ये पता लगाया जा सकता है कि कौन से क्षेत्रों में प्रदूषण कितना है? इस प्रणाली के माध्यम से आकड़ों को सरलता से समझा और वर्गीकृत जा सकता है।<ref>माजिद हुसैन [http://books.google.co.in/books?id=WelOAgAAQBAJ&lpg=PA25&ots=SbQS87bC5H&dq=%22%E0%A4%AD%E0%A5%8C%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE%20%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%22&pg=PA25#v=onepage&q=%22%E0%A4%AD%E0%A5%8C%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE%20%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%22&f=false भौगोलिक सूचना तंत्र के उपयोग]</ref>
 
भूगोलीय निर्देशांक प्रणाली को मुख्यत: तीन तरीकों से देखा जा सकता है।
* '''डाटाबेसडेटाबेस''' : यह डाटाबेसडेटाबेस संसार का अनन्य तरीके का डाटाबेसडेटाबेस होता है। एक तरह से यह भूज्ञान की सूचना प्रणाली होती है। बुनियादी तौर पर भूसूप्रण (जीआईएस) प्रणाली मुख्यत: संरचनात्मक डाटाबेस पर आधारित होती है, जो कि विश्व के बारे में भौगोलिक शब्दों के आधार पर बताती है।
* '''मानचित्र''' : यह ऐसे मानचित्रों का समूह होता है जो पृथ्वी की सतह सबंधी बातें विस्तार से बताते है।
* '''प्रतिरूप''' : यह सूचना परिवर्तन उपकरणों का समूह होता है जिसके माध्यम से वर्तमान डाटाबेस द्वारा नया डाटाबेस बनाया जाता है।