"बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय" के अवतरणों में अंतर

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[[चित्र:Bankim Chandra Chattopadhyay.jpg|right | thumb |250px200px| '''वन्दे मातरम्''' के रचयिता बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय]]
'''बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय''' ([[बंगला]]: বঙ্কিমচন্দ্র চট্টোপাধ্যায়) (१८३८ - १८९४) [[बंगला]] के प्रख्यात [[उपन्यास]]कार, [[कवि]], [[गद्य]]कार और पत्रकार थे। [[भारत]] के राष्ट्रीय गीत '[[वन्दे मातरम्]] उनकी ही रचना है जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के काल में क्रान्तिकारियों का प्रेरणास्रोत बन गया था। [[रवीन्द्रनाथ ठाकुर]] के पूर्ववर्ती बांग्ला साहित्यकारों में उनका अन्यतम स्थान है।
 
 
बंकिमचंद्र के उपन्यासों का भारत की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद किया गया। बांग्ला में सिर्फ बंकिम और [[शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय]] को यह गौरव हासिल है कि उनकी रचनाएं [[हिन्दी]] सहित सभी भारतीय भाषाओं में आज भी चाव से पढ़ी जाती है। लोकप्रियता के मामले में बंकिम और शरद [[रवीन्द्र नातह टैगोर|रविन्द्र नाथ टैगोर]] से भी आगे हैं। बंकिम बहुमुखी प्रतिभा वाले रचनाकार थे। उनके कथा साहित्य के अधिकतर पात्र शहरी मध्यम वर्ग के लोग हैं। इनके पात्र आधुनिक जीवन की त्रासदियों और प्राचीन काल की परंपराओं से जुड़ी दिक्कतों से साथ साथ जूझते हैं। यह समस्या भारत भर के किसी भी प्रांत के शहरी मध्यम वर्ग के समक्ष आती है। लिहाजा मध्यम वर्ग का पाठक बंकिम के उपन्यासों में अपनी छवि देखता है।
 
==चित्रावली==
[[चित्र:Bankim.jpg|right | thumb |250px|बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय]]
 
== वाह्य सूत्र ==