"इथेनॉल" के अवतरणों में अंतर

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(१) '''संश्लेषण विधि'''-एथिलीन गैस को सांद्र सल्फ़्यूरिक अम्ल में शोषित कराने से एथिल हाइड्रोजन सल्फ़ेट बनता है जो जल के साथ उबालने पर उद्धिघटित (हाइड्रोलाइज़) होकर एथिल ऐल्कोहल देता है। इस विधि का प्रचलन अभी अधिक नहीं है।
 
(२) '''किण्वीकरण विधि'''- इसके द्वारा किसी भी शक्करमय पदार्थ ([[गन्ना|गन्ने]] की शक्कर, ग्लूकोस, शोरा, [[महुआ|महुए]] का फूल आदि) या स्टार्चमय पदार्थ ([[आलू]], [[चावल]], [[जौ]], [[मकई]] आदि) से ऐल्कोहल व्यापारिक मात्रा में बनाते हैं। साधारणत: ऐल्कोहल शीरे से, जो शक्कर और चुकंदर के मिलों में व्यर्थ बचा पदार्थ है, बनाया जाता है। शीरे में लगभग ३० से ३५ प्रतिशत तक गन्ने की शक्कर तथा लगभग इतना ही ग्लुकोस और फ्रुंक्टोस घुला रहता है। शोरे में इतना ही जल मिलाया जाता है जितने से उसका आपेक्षिक घनत्व १.०३ से लेकर १.०४ तक हो जाता है। जीवाणुओं तथा अन्य अनावश्यक किण्वों की वृद्धि रोकने के लिए इस घोल में सल्फ़्यूरिक अम्ल की कुछ बूंदें डाल देते हैं। अब इसमें थोड़ा सा यीस्ट डालकर इसे ३०°-४०° सेंटीग्रेड ताप पर रख देते हैं। लगभग ४०-५० घंटों में किण्वीकरण समाप्त हो जाता है। इस प्रकार से शीरे की लगभग ९५% शक्कर विच्छिन्न होकर ऐल्कोहल और कार्बन-डाइ-आक्साइड में परिवर्तित हो जाती है।
इस अभिक्रिया को मोटे तौर पर निम्नलिखित प्रकार से लिखा जा सकता है-<ref name=SAFFIOTI>SAFFIOTI, WALDEMAR; Fundamentos de Química; Companhia Editora Nacional; São Paulo, Brasil; 1968</ref>:
 
:<big>C<sub>6</sub>H<sub>12</sub>O<sub>6</sub> → 2 C<sub>2</sub>H<sub>5</sub>OH + 2 CO<sub>2</sub></big>
 
साधारणत: ऐल्कोहल [[शीरा|शीरे]] से, जो [[शक्कर]] और [[चुकंदर]] के मिलों में व्यर्थ बचा पदार्थ है, बनाया जाता है। शीरे में लगभग ३० से ३५ प्रतिशत तक गन्ने की शक्कर तथा लगभग इतना ही ग्लुकोस और फ्रुंक्टोस घुला रहता है। शोरे में इतना ही जल मिलाया जाता है जितने से उसका आपेक्षिक घनत्व १.०३ से लेकर १.०४ तक हो जाता है। जीवाणुओं तथा अन्य अनावश्यक किण्वों की वृद्धि रोकने के लिए इस घोल में सल्फ़्यूरिक अम्ल की कुछ बूंदें डाल देते हैं। अब इसमें थोड़ा सा यीस्ट डालकर इसे ३०°-४०° सेंटीग्रेड ताप पर रख देते हैं। लगभग ४०-५० घंटों में किण्वीकरण समाप्त हो जाता है। इस प्रकार से शीरे की लगभग ९५% शक्कर विच्छिन्न होकर ऐल्कोहल और कार्बन-डाइ-आक्साइड में परिवर्तित हो जाती है।
 
[[स्टार्च]]मय पदार्थों को पहले छोटे-छोटे टुकड़े कर या पानी के साथ पीसकर तप्त भाप में उबालते हैं। स्टार्चमय पदार्थ लेई की तरह हो जाता है; इसे हलवा (अंग्रेजी में मैश) कहते हैं। मैश में थोड़ा माल्ट निष्कर्ष मिलाकर ५५°-६०° सेंटीग्रेड ताप पर रख देते हैं। माल्ट निष्कर्ष में विद्यमान डायस्टेस-एंज़ाइम द्वारा स्टार्च का उद्विघटन होकर माल्टोस बनता है। इस क्रिया में लगभग आध घंटा लगता है और जो द्रव इस प्रकार मिलता है उसे क्वाथ (अंग्रेजी में वर्ट) कहते हैं। क्वाथ को उबालकर इसमें विद्यमान डायस्टेस को नष्ट कर देते हैं; इसे २०° सें. ताप तक ठंडा कर इसमें [[यीस्ट]] डालते हैं और फिर इसे २०°-३७° सें. के बीच रख छोड़ते हैं। यीस्ट में विद्यमान माल्टेस-एंज़ाइम माल्टोस को उद्विघटित कर ग्लूकोस में परिवर्तित करता है। इस ग्लूकोस को फिर ज़ाइमेस-एंज़ाइम द्वारा विघटित कर एल्कोहल प्राप्त करते हैं। इस प्रकार से एल्कोल बनाने में ३-४ दिन लगते हैं।