"वरंगल" के अवतरणों में अंतर

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| प्रदेश = आंध्र प्रदेशतेलंगाना
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| शासक पद = [[महापौर]]
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'''वारंगल''' शहर, उत्तरी [[आन्ध्र प्रदेशतेलंगाना]] राज्य, दक्षिण–पूर्व [[भारत]] में स्थित है। यह चेन्नई–काज़िपेट्ट–दिल्ली राजमार्ग पर स्थित है। वारंगल 12वीं सदी में उत्कर्ष पर रहे आन्ध्र प्रदेश के काकतीयों की प्राचीन राजधानी था। वर्तमान शहर के दक्षिण–पूर्व में स्थित वारंगल क़िला कभी दो दीवारों से घिरा हुआ था। जिनमें भीतरी दीवार के पत्थर के द्वार (संचार) और बाहरी दीवार के अवशेष मौजूद हैं। 1162 में निर्मित 1000 स्तम्भों वाला मन्दिर शहर के भीतर ही स्थित है।
 
== उत्पत्ति ==
 
वारंगल के संस्ककृत कवियों में सर्वशास्त्र विशारद का लेखक वीरभल्लातदेशिक, और नलकीर्तिकामुदी के रचयिता अगस्त्य के नाम उल्लेखनीय हें। कहा जाता है कि अलंकारशास्त्र के प्रसिद्ध ग्रन्थ प्रतापरुद्रभूषण का लेखक विद्यनाथ यही अगस्त्य था। गणपति का हस्तिसेनापति जयप, नृत्यरत्नावली का रचयिता था। संस्कृत कवि शाकल्यमल्ल भी इसी का समकालीन था। तेलगु के कवियों में रंगनाथ रामायणुम का लेखक पलकुरिकी सोमनाथ मुख्य हैं। इसी समय भास्कर रामायणुम भी लिखी गई। वारंगल नरेश प्रतापरुद्र स्वयं भी तेलगु का अच्छा कवि था। इसने नीतिसार नामक ग्रन्थ लिखा था। दिल्ली के तुग़लक़ वंश की शक्ति क्षीण होने पर 1335-1336 के पश्चात् में कपय नायक ने स्वतंत्र राज्य स्थापित कर लिया। इसकी राजधानी वारंगल में थी। 1442 ई. में वारंगल पर बहमनी राज्य का आधिपत्य हो गया और तत्पश्चात् गोलकुंडा के कुतुबशाही नरेशों का। इस समय शिताब ख़ाँ वारंगल का सूबेदार नियुक्त हुआ। उसने शीध्र ही स्वतंत्र राज्य स्थापित कर लिया। किन्तु कुछ समय के उपरान्त वारंगल को गोलकुंडा के साथ ही औरंगज़ेब के विस्तृत मुग़ल साम्राज्य का अंग बनना पड़ा। मुग़ल साम्राज्य के अन्तिम समय में वारंगल की नई रियासत हैदराबाद में सम्मिलित कर ली गई।
 
 
 
== उद्योग और व्यापार ==
== जनसंख्या ==
2001 की गणना के अनुसार वारंगल शहर की जनसंख्या 5,28,570 है। और वारंगल ज़िले की कुल जनसंख्या 32,31,174 है।
==सन्दर्भ==
 
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[[श्रेणी:आंध्र प्रदेश]]
{{तेलंगाना}}
[[श्रेणी:आन्ध्र प्रदेशतेलंगाना के नगर]]