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==विभिन्न ग्रन्थों में हिन्दू शब्द का उल्लेख==
 
हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते॥
- बृहस्पति आगम
 
हीनं च दूष्यत्येव हिन्दुरित्युच्चते प्रिये (जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं)
- मेरुतन्त्र (शैव ग्रन्थ)
 
हीनं दूषयति इति हिन्दू
- कल्पद्रुम
 
हिनस्ति तपसा पापां दैहिकां दुष्टमानसान।
हेतिभिः शत्रुवर्गं च स हिंदुरभिधियते॥
- पारिजातहरण
 
ओंकारमंत्रमूलाढ्य पुनर्जन्म दृढाशयः।
गोभक्तो भारतगुरूर्हिन्दुर्हिंसनदूषकः॥
(वो जो ओंकार को ईश्वरीय ध्वनि माने, कर्मों पर विश्वास करे, गौपालक, बुराइयों को दूर रखे वो हिन्दू है)
- माधव दिग्विजय
 
ऋग्वेद में एक ऋषि का नाम 'सैन्धव' था जो बाद में "हैन्दाव/हिन्दव" नाम से प्रचलित हुए।
 
ऋग्वेद (८:२:४१) में 'विवहिंदु' नाम के राजा का वर्णन है जिसने ४६००० गौएँ दान में दी थी। विवहिंदु बहुत पराक्रमी और दानी राजा था ऋग्वेद मण्डल ८ में भी उसका वर्णन है।
 
[[श्रेणी:भारत]]
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