"खण्डकाव्य" के अवतरणों में अंतर

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[[संस्कृत]] साहित्य में इसकी जो एकमात्र परिभाषा [[साहित्य दर्पण]] में उपलब्ध है वह इस प्रकार है-
 
भाषा विभाषा नियमात् काव्यं सर्गसमुत्थितम् ।सर्गसमुत्थितम्।
एकार्थप्रवणै: पद्यै: संधि-साग्रयवर्जितम् ।साग्रयवर्जितम्।
खंड काव्यं भवेत् काव्यस्यैक देशानुसारि च।