"सम्भल": अवतरणों में अंतर

2 बाइट्स जोड़े गए ,  8 वर्ष पहले
छो
कोष्टक से पहले खाली स्थान छोड़ा।
No edit summary
छो (कोष्टक से पहले खाली स्थान छोड़ा।)
सरायतरीन, सम्भल का एक उपनगर लम्बे समय से हस्तशिल्प वस्तुओं के लिए जाना जाता है. इन वस्तुओं को बनाने वाले शिल्पकारों को अपनी कला का लिए काफी सम्मान दिया जाता है. (यद्यपि वे कम दर पर व अमानवीय वातावरण में कार्य करते हैं) सरायतरीन को पशुओं के सींगों, हड्डियों, लकडी, शंखों, पीतल, बांस व नारियल से बने हस्तशिल्पों व फैशन आभूषणों के केंद्र के रूप में जाना जाता है. इस कसबे की आबादी ७०,००० है जिनमें ४०,००० लोग कारीगर के रूप में कार्य करते हैं. सरायतरीन की एक और विशेषता सींग उर्वरक बनाने की है. पुराने समय में जब रासायनिक उर्वरक उपलब्ध नहीं थे, किसान पशुओं की हड्डियों वे सींगों से बने उर्वरकों का प्रयोग करते थे. अब सींगों के उर्वरक का व्यापर समाप्त हो गया है क्योंकि किसान सस्ते रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करने लगे हैं. अब हाजी रहम इलाही साहिब (१९९२ के राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता) व कुछ अन्य की कुछ ही फैक्टरियाँ रह गयीं हैं.
 
सम्भल मेंथा तेल (मेंथा के पौधे से निकला गया तेल जो कि दवाईओं आदि में रसायन के तौर पर प्रयोग होता है) का सबसे बड़ा बाज़ार है. सम्भल के साथ- साथ चंदौसी व बाराबंकी (तीनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हिस्से हैं) का भी उत्पादन में बराबर का हाथ है.
 
चक्की का पाट (पत्थर का बना पुराने समय में अनाज पीसने में काम आने वाला) सम्भल का एक प्रमुख सांस्कृतिक व ऐतिहासिक आकर्षण है जो जमीं से १५ मी कि ऊंचाई पर टंगा है. शहर में इसके बारे में एक कहानी बताई जाती है कि एक पेशेवर कूदनेवाले (जिसे 'नट' कहते हैं) ने इस भारी पत्थर के टुकड़े को बिना किसी अन्य सहारे के अकेले ऊपर टांग दिया था.
 
यह शहर हकीमों (यूनानी चिकित्सक) के लिए जाना जाता है. स्वर्गीय हकीम रईस(मृत्यु २००८) सबसे अधिक प्रसिद्व थे. उनकी वंशावली उनके पुत्रों हकीम ज़फर(बड़े) व हकीम नासर(छोटे) द्वारा आगे बढाई जा रही है. देश के सबसे प्रसिद्व यूनानी ब्रांड दर्दमंद, जनता दर्दमंद दवाखाना भी सम्भल से ही हकीम कौसर अहमद द्वारा बनाई जाती है. अधिकांश दवाएं अरब, उत्तर व पूर्व देशों में भेजी जातीं हैं.