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'''एकल स्वामित्व''' (Sole proprietorship) एक प्रकार का व्यावसायिक [[संगठन]] है। इसका अर्थ है- 'एक व्यक्ति का स्वामित्व'। अर्थात् एक ही व्यक्ति व्यवसाय का स्वामी होता है। इस प्रकार एकल स्वामित्व वह व्यापार संगठन है, जिसमें एक ही व्यक्ति स्वामी होता है और व्यवसाय से संबंधित सभी कार्यकलापों का प्रबंधन और नियंत्रण उसी के हाथ में होता है। एकल व्यवसाय के स्वामी और संचालक ‘एकल स्वामी’ या ‘एकल व्यवसायी’ कहलाते हैं। एकल व्यवसायी अपने व्यवसाय से सम्बन्धित सभी संसाधनों को जुटाकर उन्हें योजनाबद्ध ढंग से व्यवस्थित करता हैं तथा लाभ कमाने के एकमात्र उद्देश्य से सारी गतिविधियों का संचालन करता है।
 
== एकल स्वामित्व की विशेषताएँ==
एकल स्वामित्व व्यवसाय स्वरूप की निम्नलिखित विशेषताएं हैं -
 
* '''असीमित देनदारी''' : एकल स्वामित्व वाले व्यवसाय के स्वामी की देनदारी असीमित होती है। इसका अर्थ यह है कि हानि की स्थिति में व्यवसाय की देनदारियां चुकाने के लिए व्यवसाय की संपदा या उसकी निजी संपत्ति बेचनी पड़ सकती है।
 
== एकल स्वामित्व के लाभ ==
[[भारत]] में एकल स्वामित्व बहुत प्रचलित है। इसके निम्नलिखित लाभ हैं :
 
* '''स्वरोजगार देना''' : एकल स्वामित्व व्यक्तियों को स्वयं रोजगार के अवसर प्रदान करता है। वह स्वयं ही सेवायोजित नहीं होता। बल्कि औरों को भी रोजगार उपलब्ध् कराता है। आपने देखा होगा कि विभिन्न दुकानों पर कई लोग कार्य करते है जो मालिक की माल विक्रय में मदद करते है। इस प्रकार यह देश में बेरोजगारी और निर्ध्नता दूर करने में भी मददगार है।
 
== एकल स्वामित्व की सीमाएँ==
ऊपर बताए गए गुणों के कारण एक व्यक्ति द्वारा संचालित व्यवसाय संगठन व्यवसाय का सबसे अच्छा स्वरूप है। लेकिन अन्य संगठनों के समान इसकी कुछ सीमाएं भी हैं।
 
* '''प्रबंधन सम्बंधी विशेषज्ञता का अभाव''' : एकल स्वामी प्रबंध के सभी पहलुओं में कुशल नहीं हो सकता है। वह प्रशासन और नियोजन में दक्ष हो सकता है, लेकिन विपणन में कमजोर हो सकता है।
 
== इन्हें भी देखें==
*[[साझेदारी]]
*[[हिन्दू अविभाजित परिवार]]