"स्वप्न" के अवतरणों में अंतर

आकार में कोई परिवर्तन नहीं ,  7 वर्ष पहले
छो
बॉट से अल्पविराम (,) की स्थिति ठीक की।
छो (साँचा जोड़ा।)
छो (बॉट से अल्पविराम (,) की स्थिति ठीक की।)
सब लय होत स्वभाव.
 
चैतन्य से दीप्त अज्ञान वृत्ति से मुक्त होकर आनन्द को भोगता है. इसी कारण सोकर उठा हुआ मनुष्य कहता है मैं सुख पूर्वक सोया , बढ़े चैन से सोया, इन शब्दों से सुषुप्ति में आनन्द के अस्तित्व का पता चलता है. मुझे कुछ याद नहीं है,इससे अज्ञान के अस्तित्व का भी पता चलता है.