"मृच्छकटिकम्" के अवतरणों में अंतर

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== रचनाकार एवं रचनाकाल ==
यह महाराज [[शूद्रक]] की कृति मानी जाती है जो [[भास]] और [[कालिदास]] की भांति राज कवि हुए है ।है। मृच्छकटिक ईसवी प्रथम शती के लगभग की रचना कही जा सकती है। कहा जाता है, [[भास]]प्रणीत 'चारूदत्त' नामक चतुरंगी रूपक की कथावस्तु को परिवर्धित कर किसी परवर्ती [[शूद्र]] कवि के द्वारा मृच्छकटिक की रचना हुई है। वस्तुत: इसकी कथावस्तु का आधार [[बृहत्कथा]] और [[कथासरित्सागर]] में वर्णित कथाओं में मिलता है।
 
=== प्राचीनता ===