"द्रव": अवतरणों में अंतर

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साधारणत: कोई भी पदार्थ केवल एक ही प्रकार के द्रव रूप में प्राप्त होता है, किंतु इसके कुछ अपवाद भी मिलते हैं, जैसे हीलियम गैस को द्रवित करके दो प्रकार के हीलियम द्रव प्राप्त किए जा सकते हैं। उसी प्रकार पैरा-ऐज़ॉक्सी-ऐनिसोल (Para-azoxy-anisole) प्रकाशत: विषमदैशिक (anisotropic) द्रव के रूप में, क्रिस्टलीय अवस्था में तथा सामान्य द्रव के रूप में भी प्राप्त हो सकता है।
 
== द्रव की आणविक रचना ==
प्रत्येक द्रव्य के अणु एक दूसरे को आकर्षित किए रहते हैं। इस आकर्षण को अंतराणुक आकर्षण कहते हैं। इसी के कारण किसी द्रव्य के अणु एकत्र रहते हैं। द्रव्य के अणुओं पर एक विकर्षण बल भी लगता रहता है। यह बल अणुओं को एक दूसरे के अति निकट आने से रोकता है। ठोस के अणुओं के बीच ये बल प्रबल होते हैं। द्रवों में इनके मान अल्प और गैसों में लगभग नगण्य होते हैं।
 
[[एक्स-किरण विवर्तन]] (x-ray differaction) के प्रयोगों द्वारा इस प्रकार की निकट परास व्यवस्था की उपस्थिति वैज्ञानिकों द्वारा प्रमाणित की जा चुकी है। जे.डी. बरनाल (J.D. Bernal) और आर.एच. फाउलर (R.H. Fowler) ने एक्स-किरण विवर्तन का अध्ययन किया है और उसकी संख्या का फूर्ये (Fourier) विश्लेषण करके इस तथ्य को प्रतिपादित किया है।
 
== द्रव के ऊष्मागतिक और यांत्रिक गुण (Thermodynamic and Mechanical Properties of Liquids)==
द्रव के क्रांतिक विंदु, [[श्यानता]] तथा अन्य गुणों की गणना के लिए बहुत से सैद्धांतिक प्रयत्न किए गए हैं। पहले के अध्ययनों के अधिकतर लेनार्ड जोन्स विभव (Lennard Jones poetntial) का उपयोग किया गया है। द्रवों का विवर सिद्धांत (Hole Theory of Liquids) अपेक्षाकृत नवीन सिद्धांत है।
 
== द्रवों के प्रकाशीय और विद्युतीय गुण ==
बहुत से द्रव विद्युच्छुचालक हैं। इनकी चालकता का कारण यह है कि इनमें स्वतंत्र इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं। द्रव लवणों की विद्युच्चालकता उनके आयनीकरण पर निर्भर करती है। अन्य द्रव दो मुख्य भागों में बाँटे जा सकते हैं। जो द्रव विद्युन्मय वस्तु की ओर-आकर्षित होते हैं, उन्हें ध्रुवीय (polar) और जो आकर्षित नहीं होते उन्हें अध्रुवीय (non-polar) कहा जाता है। वास्तविकता यह है कि ध्रुवीय द्रवों के अणु में स्थायी रूप से कुछ द्वध्रुिव-आघूर्ण (dipole moments) होते हैं, परतु अध्रुवीय द्रवों के अणुओं में ऐसा नहीं होता। [[बेंजीन]] अध्रुवीय द्रव है। अध्रुवीय द्रवों का परावैद्युतांक (dielectric constant) १ और ३ के बीच में पाया जाता है। इनका दृश्य (visible) क्षेत्रीय वर्तनांक इनके रेडियो आवृत्तीय (radio frequency) परावैद्युतांक के वर्गमूल के बराबर होता है। ध्रुवीय द्रवों के परावैद्युतांक अध्रुवीय द्रवों के परावैद्युतांकों की अपेक्षा लगभग १० से १०० गुना अधिक होते हैं, किंतु इनका वर्तनांक (refractive index) लगभग उतना ही होता है। द्रव समान्यत: समदैशिक (isotropic) होते हैं।