"नस्लवाद": अवतरणों में अंतर

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इतिहास में, [[दासप्रथा (पाश्चात्य)#हब्शी दासता|नस्लवाद अटलांटिक दास व्यापार]] के पीछे एक प्रेरणा शक्ति थी, [[अमेरिका]] में उन्नीसवीं और शुरुआती बीसवीं सदी के नस्लीय अलगाव, और [[दक्षिण अफ्रीका]] के अंतर्गत [[रंगभेद नीति|रंगभेद]] भी इसी सिद्धांत पर आधारित थे। यह सिद्धांत [[नरसंहार]] के राजनीतिक और वैचारिक आधार का एक प्रमुख हिस्सा रहा है जैसे [[यहूदी नरसंहार]], पर [[उपनिवेश|औपनिवेशिक]] संदर्भों में भी जैसे [[दक्षिण अमेरिका]] और [[कांगो]] में रबर बूम के रूप में, अमेरिका के उपर [[यूरोप|यूरोपीय]] विजय में और [[अफ्रीका]], एशिया और [[ऑस्ट्रेलिया]] के औपनिवेशीकरण में।
 
== भारत में नस्लवाद ==
उत्तर भारतीय जिस दृष्टि से दक्षिण भारतीयों को देखते हैं उस पर हमारी रंगभेद चेतना की ही धूल जमी हुई है। अफ्रीकियों को हम हिकारत से ‘हब्शी’ पुकारते हैं। इसी घृणात्मक तरीके को विस्तार देते हुए हम समस्त दक्षिण भारतीयों को ‘मद्रासी’ होने का उलाहना देते हैं। काले रंग के कारण ही हम उनके भोजन, भाषा, रीति-रिवाज एवं सलीके तक का उपहास उड़ाते हैं। अफ्रीकियों की नजरों में भारतीय लोग यूरोपियों और अमरीकियों से भी अधिक नस्लवादी हैं।<ref>http://www.punjabkesari.in/news/article-215665</ref> रंगभेद और जातिवाद आज विश्व भर में फैल चुका है।
 
 
== सन्दर्भ ==
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