"श्यामसुन्दर दास" के अवतरणों में अंतर

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बाबू श्याम सुंदर दास ने अपने जीवन के पचास वर्ष हिंदी की सेवा करते हुए व्यतीत किए उनकी इस हिंदी सेवा को ध्यान में रखते हुए ही राष्ट्रकवि [[मैथिली शरण गुप्त]] ने निम्न पंक्तियाँ लिखी हैं-
 
: '''मातृभाषा के हुए जो विगत वर्ष पचास ।पचास।'''
: '''नाम उनका एक ही है श्याम सुंदरदास ।।सुंदरदास।।'''
 
[[सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. राधा कृष्णन]] ने शब्दों में ''बाबू श्याम सुंदर अपनी विद्वत्ता का वह आदर्श छोड़ गए हैं जो हिंदी के विद्वानों की वर्तमान पीढ़ी को उन्नति करने की प्रेरणा देता रहेगा।''