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दूरभाष के अस्तित्व के संभावना सर्वप्रथम संयुक्त राज्य अमरीका के [[ऐलेक्जैंडर ग्रैहैम बेल]] की इस उक्ति में प्रकट हुई: '''यदि मैं विद्युद्वारा की तीव्रता को ध्वनि के उतार चढ़ाव के अनुसार उसी प्रकार न्यूनाधिक करने की व्यवस्था कर पाऊँ, जैसा ध्वनिसंचरण के समय वायु के घनत्व में होता है, तो मैं मुख से बोले गए शब्दों को भी तारप्रेषण की विधि से एक स्थान से दूसरे स्थान को संचारित कर सकने में समर्थ हो सकूंगा।'''
 
अपनी इसी धारणा के आधार पर बेल ने अपने सहायक टॉमस वाट्सन की सहायता से दूरभाष पद्धति का आविष्कार करने के हेतु प्रयास आरंभ कर दिया और अंत में '''10 मार्च, 1876 ई''' को वे ऐसा यंत्र बना सकने में सफल हो गए जिससे उन्होंने वाट्सन के लिये संदेश प्रेषित किया- '''मि. वाट्सन, यहाँ आओ। मुझे तुम्हारी आवश्यकता है'''। लगभग उसी समय अमरीका में इसी संबंध में कुछ अन्य लोग विद्युद्विधि द्वारा वाग्ध्वनि का संचरण करने के संबंध में प्रयोग कर रहे थे और प्रो.प्रो॰ एलिशा ग्रे नामक वैज्ञानिक ने, बेल द्वारा अपने यंत्र को एकस्व (पेटेंट) कराने का प्रार्थनापत्र दिए जाने के केवल तीन घंटे बाद ही, अपने एक ऐसे ही यंत्र को एकस्व कराने के हेतु आवेदन किया। इसपर बड़ा विवाद उत्पन्न हुआ और लगभग 600 विभिन्न मुकदमें बेल और ग्रे के बीच चलने के बाद अंत में बेल की विजय हुई और वे दूरभाष के वास्तविक आविष्कारक के रूप में प्रतिष्ठित हुए।
 
== दूरभाष का प्रसार ==