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जैव-चिकित्सा संबंधी अनुसंधान में इस्तेमाल किये गए चिम्पांजियों को ज्यादातर प्रयोगशाला संबंधी जानवरों के मामले में प्रयोग करने के बाद मार डालने के प्रचलन की बजाय कई दशकों तक बार-बार इस्तेमाल किया जाता है. अमेरिका की प्रयोगशालाओं में वर्तमान में मौजूद कुछ चिम्पांजियों को 40 से अधिक वर्षों से प्रयोगों में इस्तेमाल किया जा रहा है.<ref name="HSUSbetter"> [http://www.hsus.org/animals_in_research/chimps_deserve_better/ चिम्पस डिज़र्व बेटर], संयुक्त राज्य अमेरिका की ह्यूमन सोसायटी.</ref> प्रोजेक्ट आरएंडआर के अनुसार अमेरिका की प्रयोगशालाओं में रखे गये चिम्पांजियों को मुक्त करने के लिये एक अभियान – न्यू इंगलैंड एंटी-विविसेक्शन सोसायटी द्वारा जेन गुडऑल और अन्य प्राइमेट शोधकर्ताओं के सहयोग से चलाया जा रहा है – अमेरिकी प्रयोगशाला में सबसे पुराना ज्ञात चिम्प, वेनका है जिसका जन्म 21 मई 1954 को फ़्लोरिडा की एक प्रयोगशाला में हुआ था.<ref>{{Cite web|author=A former Yerkes lab worker |url=http://www.releasechimps.org/chimpanzees/their-stories/wenka/ |title=Release & Restitution for Chimpanzees in U.S. Laboratories » Wenka |publisher=Releasechimps.org |date= |accessdate=2009-06-06}}</ref> उसे उसके जन्म के दिन ही एक दृष्टि प्रयोग में इस्तेमाल के लिये उसकी माँ से अलग कर दिया गया था, यह प्रयोग 17 महीनों तक चला और उसके बाद उसे एक पालतू जानवर के रूप में उत्तरी कैरोलिना के एक परिवार को बेच दिया गया. 1957 में उसे फ़िर से यर्केस नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर में वापस लाया गया जब वह इतना बड़ा हो गया था कि उसे संभालना मुश्किल हो गया था. तब से उसने छः बार अपने बच्चों को जन्म दिया है और उसे शराब के इस्तेमाल, खाने वाले गर्भ निरोधकों, बुढ़ापा और संज्ञानात्मक अध्ययनों में इस्तेमाल किया गया है.<ref name="R&RWenka"> [http://www.releasechimps.org/chimpanzees/their-stories/wenka/ वेंका], आर&amp;आर परियोजना, न्यू इंग्लैंड एंटी-विविसेक्शन सोसायटी.</ref>
 
चिम्पांजी जीनोम के प्रकाशन के साथ प्रयोगशालाओं में चिम्पांजियों के इस्तेमाल को बढ़ाने की कथित तौर पर योजनाएं तैयार की गयी हैं जिसके बारे में कुछ वैज्ञानिकों का तर्क है कि शोध के लिये चिम्पांजियों के प्रजनन पर संघीय प्रतिबंध (फ़ेडरल मोरेटोरियम) को हटा लिया जाना चाहिये.<ref name="Lovgren"/><ref name="Langley15"> लैंगली, गिल. [http://www.eceae.org/english/documents/NoKReport.pdf नेक्सट टू किन: ए रिपोर्ट ऑन दी यूज़ ऑफ प्रिमेट्स इन एक्सपेरिमेंट्स], विभाजन के उन्मूलन के लिए ब्रिटिश संघ, पी. 15, सिटिंग वंडेबर्ग, जेएल, एट ऑल. "ए यूनिक बायोमेडिकल रिसोर्स एट रिस्क", नेचुरल 437:30-32.</ref> यू.एस. नेशनल इन्स्टिट्यूट्स आफ़ हेल्थ (एनआईएच) द्वारा 1996 में पाँच साल का एक प्रतिबंध लगाया गया था क्योंकि एचआईवी संबंधी शोध के लिये बड़ी संख्या में चिम्पांजियों को पैदा किया जा रहा था, और इसे 2001 के बाद से वार्षिक रूप से आगे बढ़ाया जा रहा था.<ref name="Lovgren"/>
 
अन्य शोधकर्ताओं का तर्क है कि चिम्पांजी विशिष्ट प्रकार के जानवर हैं और इनका इस्तेमाल या तो प्रयोगशालाओं में नहीं किया जाना चाहिये या फ़िर इनके साथ अलग तरह से व्यवहार किया जाना चाहिये. एक विकासवादी जीव विज्ञानी और सैन डियेगो में कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के प्राइमेट विशेषज्ञ, पास्कल गैग्नियक्स यह तर्क देते हैं कि चिम्पांजियों की अपने बारे में समझ, औजारों का इस्तेमाल और मनुष्यों से आनुवंशिक समानता को देखते हुए चिम्पांजियों के इस्तेमाल से किये जाने वाले अध्ययनों में उन नैतिक दिशानिर्देशों का पालन किया जाना चाहिये जिन्हें आम-सहमति देने में अक्षम मानवीय विषयों के लिये इस्तेमाल किया जाता है.<ref name="Lovgren"/> इसके अलावा हाल के एक अध्ययन में यह बताया गया है कि प्रयोगशालाओं से मुक्त किये गये चिम्पांजियों में यातना के बाद होने वाली एक तनाव संबंधी समस्या देखी जाती है.<ref>{{Cite journal|url=http://www.releasechimps.org/pdfs/ExecSumTraumaFINAL.pdf|title=Building an Inner Sanctuary: Complex PTSD in Chimpanzees|publisher=Journal of Trauma and Dissociation|author=Bradshaw, G.A. et al|volume=9|issue=1|pages=9–34}}</ref> यर्केस नेशनल प्राइमेट रिसर्च लैबोरेटरी के निदेशक, स्टुअर्ट ज़ोला इस बात से सहमत नहीं हैं. उन्होंने ''नेशनल ज्योग्राफ़िक'' को बताया: "मुझे नहीं लगता है कि हमें किसी प्रजाति के साथ मानवीय रूप से व्यवहार करने के लिये अपने दायित्व के बीच किसी तरह का अंतर रखना चाहिये, चाहे यह कोई चूहा हो या बंदर हो या फ़िर चिम्पांजी. इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है कि हम इसका कितना भला चाह सकते हैं, आखिरकार चिम्पांजी इंसान नहीं हैं."<ref name="Lovgren"/>