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'''{{मुख्य|बालाजी विश्वनाथ}}'''
 
पेशवाओं के क्रम में सातवें पेशवा किंतु पेशवाई सत्ता तथा पेशवावंश के वास्तविक संस्थापक, चितपावन ब्राह्मण, बालाजी विश्वनाथ का जन्म १६६० ई. के आसपास श्रीवर्धन नामक गाँव में हुआ था। उसके पूर्वज श्रीवर्धन गाँव के मौरूसी देशमुख थे। सीदियों के आतंक से बालाजी विश्वनाथ को किशोरावस्था में ही जन्मस्थान छोड़ना पड़ा, किंतु अपनी प्रतिभा से उसने उत्तरोत्तर उन्नति की तथा साथ में अमित अनुभव भी संचय किया। औरंगजेब के बंदीगह से मुक्ति पा राज्यारोहण के ध्येय से जब महाराजा शाहू ने महाराष्ट्र में पदार्पण किया, तब बालाजी विश्वनाथ ने उसका पक्ष ग्रहण कर उसकी प्रबल प्रतिद्वंद्विनी ताराबाई तथा प्रमुख शत्रु चंद्रसेन जाघव, ऊदाजी च्हवान, और दामाजी योरट को परास्त कर न केवल शाहू को सिंहासन किया, वरन् उसकी स्थिति सुदृढ़ कर महाराष्ट्र को पारस्परिक संघर्ष से ध्वस्त होने से बचा लिया। फलत: कृतज्ञ शाहू ने १७१३ में बालाजी विश्वनाथ को पेशवा नियुक्त किया। तदनंतर, पेशवा ने सशक्त पोतनायक कान्होजी आंग्रे से समझौता कर (१७१४) शाहू की मर्यादा तथा राज्य की अभिवृद्धि की। उसका सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य मुगलों से संधिस्थापन था, जिसके परिणामस्वरूप मराठों को दक्खिन में चौथ तथा सरदेशमुखी के अधिकार प्राप्त हुए (१७१९)। इसी सिलसिले में पेशवा की दिल्ली यात्रा के अवसर पर मुगल वैभव के खोखलेपन की अनुभूति हो जाने पर महाराष्ट्रीय साम्राज्यवादी नीति का भी बीजारोपण हुआ। बालाजी विश्वनाथ की असंदिग्ध महानता के बावजूद, महाराष्ट्र संघ के शैथिल्य और त्रुटिपूर्ण आर्थिक व्यवस्था का उसपर दोषारोपण किया जाता है। अद्भुत कूटनीतिज्ञता उसकी विशेषता मानी जाती है।
 
== बाजीराव प्रथम ==
 
== माधवराव द्वितीय ==
जन्म १७७४ : मृत्यु १७९५। नारायणराव की हत्या के बाद राघोबा अपने को पेशवा घोषित करने में सफल हुआ। किंतु तत्काल ही नारायणराव की विधवा के पुत्र उत्पन्न हो जाने पर (१८ अप्रैल, १७७४) जनमत के सहयोग से-------- ने राघोवा को पदच्युत कर एक महीने अट्ठारह दिन के बालक माधवराव द्वितीय को पदासीन किया (२८ मई)। समस्त राजकीय सत्ता अब पेशवा के अभिभावक नाना फडनवीस के हाथों में केंद्रित हो गई। शक्तिलोलुप नाना ने माधवराव का व्यक्तित्व विकसित न होने दिया। न तो उसकी शिक्षा दीक्षा ही संतोषजनक हो सकी, और कुछ न वह कुछ अनुभव ही संचय कर सका। निजाम के विरुद्ध खरड़ा के युद्ध में (१७९५) वह केवल कुछ क्षणों के लिये ही उपस्थित था। आकस्मिक रूप से हो, अपने महल के छज्जे से गिरने के कारण उसकी मृत्यु हो गई।
 
== चिमनाजी अप्पा ==