"अन्तरराष्ट्रीय विधि" के अवतरणों में अंतर

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[[द्वितीय महायुद्ध]] के विजेता राष्ट्र ग्रेट ब्रिटेन, अमेरिका तथा सोवियत, रूस का अधिवेशन [[मास्को]] नगर में हुआ और एक छोटा-सा घोषणापत्र प्रकाशित किया गया। तदनंतर अनेक स्थानों में अधिवेशन होते रहे और एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के विषय में विचार-विनिमय होता रहा। सन् 1945 ई. में 25 अप्रैल से 26 जून तक, [[सैन फ्रांसिस्को]] नगर में एक सम्मेलन हुआ जिसमें पचास राज्यों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। 26 जून, 1945 ई. को [[संयुक्त राष्ट्रसंघ]] तथा [[अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय]] का घोषणापत्र सर्वसम्मति से स्वीकृत हुआ जिसके द्वारा निम्नलिखित उद्देश्यों की घोषणा की गईः
 
*(1) अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना;
 
*(2) राष्ट्रों में पारस्परिक मैत्री बढ़ाना;
 
*(3) सभी प्रकार की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा मानवीय अंतरराष्ट्रीय समस्याओं को हल करने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करना;
 
*(4) सामान्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए विभिन्न राष्ट्रों के कार्यकलापों में सामंजस्य स्थापित करना।
 
इस प्रकार संयुक्त राष्ट्रसंघ और विशेषतया [[अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय]] की स्थापना से अंतरराष्ट्रीय कानून को यथार्थ रूप में विधि (कानून) का पद प्राप्त हुआ। संयुक्त राष्ट्रसंघ ने अंतरराष्ट्रीय-विधि-आयोग की स्थापना की जिसका प्रमुख कार्य अंतरराष्ट्रीय विधि का विकास करना है।
अंतर्राष्ट्रीय कानून का विस्तार असीम तथा इसके विषय निरंतर प्रगतिशील हैं। मानव सभ्यता तथा विज्ञान के विकास के साथ इसका भी विकास उत्तरोत्तर हुआ और होता रहेगा। इसके विस्तार को सीमाबद्ध नहीं किया जा सकता। अंतर्राष्ट्रीय विधि के प्रमुख विषय इस प्रकार हैं:
 
*(1) राज्यों की मान्यता, उनके मूल अधिकार तथा कर्तव्य;
 
*(2) राज्य तथा शासन का उत्तराधिकार;
 
*(3) विदेशी राज्यों पर क्षेत्राधिकार तथा राष्ट्रीय सीमाओं के बाहर किए गए अपराधों के संबंध में क्षेत्राधिकार;
 
*(4) महासागर एवं जल प्रांगण की सीमाएँ;
 
*(5) राष्ट्रीयता तथा विदेशियों के प्रति व्यवहार;
 
*(6) शरणागत अधिकार तथा संधि के नियम;
 
*(7) राजकीय एवं वाणिज्य दूतीय समागम तथा उन्मुक्ति के नियम;
 
*(8) राज्यों के उत्तरदायित्व संबंधी नियम; तथा
 
*(9) विवाचन प्रक्रिया के नियम।
 
== अंतर्राष्ट्रीय विधि के आधार ==
अंतर्राष्ट्रीय विधि कतिपय काल्पनिक तत्वों पर आधारित है जिनमें प्रमुख ये हैं:
 
*(क) प्रत्येक राज्य का निश्चित राज्यक्षेत्र है और निजी राज्यक्षेत्र में उसको निजी मामलों में पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त है।
 
*(ख) प्रत्येक राज्य को कानूनी समतुल्यता प्राप्त है।
 
*(ग) अंतर्राष्ट्रीय विधि के अंतर्गत सभी राज्यों का समान दृष्टिकोण है।
 
*(घ) अंतर्राष्ट्रीय विधि की मान्यता राज्यों की सम्मति पर निर्भर है और उसके समक्ष सभी राज्य एक समान हैं।
 
== अंतर्राष्ट्रीय विधि का उल्लंघन ==
 
[[श्रेणी:विधि|विधि, अन्तरराष्ट्रीय]]
[[श्रेणी:अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध]]