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=== विषाद विक्षिप्ति ===
संविभ्रम (paranoia) से भिन्न मनोविक्षिप्ति और बहुत कुछ इसके विपरीत विषाद विक्षिप्ति (melancholia) कही जाती है। विषादविक्षिप्ति का रोगी अपने आपको सदा दयनीय अवस्था में सोचता है। वह अपने चारों ओर दु:ख ही दु:ख का वातावरण पाता है। वह अपने जीवन को ही व्यर्थ समझता है। वह मानव मात्र को दयनीय जीवन में देखता है1 उसके विचार में संसार का प्रलय बहुत जल्दी होनेवाला है, और प्रलय हो जाने में ही उसका भला है। वह अपने सभी संबंधियों और परिवारों का निकट भविष्य में निश्चित विनाश देखता है। जहाँ संविभ्रम का रोगी बातूनी और डींग मारनेवाला होता है, वहाँ विषादविक्षिप्ति का रोगी किसी से बोलना ही नहीं चाहता। उसे किसी से मिलने जुलने, खेलकूद में भाग लेने, किसी सुदंर दृश्य को देखने की इच्छा ही नहीं होती। उसे सारा संसार रसहीन दिखाई देता है। वह नहाने धोने, तथा हजामत बनाने को व्यर्थ समझता है। यहाँ तक कि बिना दूसरे के आग्रह किए, वह भोजन तक नहीं करता। कभी कभी वह उपवास का इतना आग्रह करता है कि उसके मुँह में नली डालकर जबरदस्ती दूध पिलाया जाता है, ताकि वह मर न जाय।
 
=== उल्लास-विषाद-मनोविक्षिप्ति ===
तीसरे प्रकार के मनोविक्षिप्त उल्लास-विषाद-मनोविक्षिप्ति हैं। वे बारी-बारी से उल्लास और विषाद की मनोदशा में रहते हैं। उल्लास की अवस्था में वे अत्यधिक चंचल हो उठते हैं, इधर उधर खूब दौड़ते हैं, अनेक लोगों से बात करते हैं, विभिन्न कामों में हाथ डालते हैं, और खूब हँसते रहते हैं। इसके प्रतिकूल आचरण विषाद की अवस्था में होता है। इन विक्षिप्तों की मनोदशा इतनी असाधारण नहीं होती कि उनकी चिकित्सा ही न हो सके। मानसिक रोगों में मनोदशाओं का बदलते रहना, चाहे मनोदशा कितनी ही असाधारण क्यों न हो, रोगी के लिये कल्याणसूचक है।
 
=== [[स्किज़ोफ्रीनिया]] ===