"शीतयुद्ध की उत्पत्ति" के अवतरणों में अंतर

सम्पादन सारांश रहित
 
[[द्वितीय विश्वयुद्ध]] के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका, [[ब्रिटेन]] और रूस ने कंधे से कन्धा मिलाकर [[धूरी राष्ट्र|धूरी राष्ट्रों]]- [[जर्मनी]], [[इटली]] और [[जापान]] के विरूद्ध संघर्ष किया था। किन्तु युद्ध समाप्त होते ही, एक ओर [[ब्रिटेन]] तथा [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] तथा दूसरी ओर [[सोवियत संघ]] में तीव्र मतभेद उत्पन्न होने लगा। बहुत जल्द ही इन मतभेदों ने तनाव की भयंकर स्थिति उत्पन्न कर दी।
 
[[शीतयुद्ध]] के लक्षण द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ही प्रकट होने लगे थे। दोनों महाशक्तियां अपने-अपने संकीर्ण स्वार्थों को ही ध्यान में रखकर युद्ध लड़ रही थी और परस्पर सहयोग की भावना का दिखावा कर रही थी। जो सहयोग की भावना युद्ध के दौरान दिखाई दे रही थी, वह युद्ध के बाद समाप्त होने लगी थी और शीतयुद्ध के लक्षण स्पष्ट तौर पर उभरने लग गए थे, दोनों गुटों में ही एक दूसरे की शिकायत करने की भावना बलवती हो गई थी। इन शिकायतों के कुछ सुदृढ़ आधार थे।
 
रूस के नेतृत्व में [[साम्यवाद|साम्यवादी]] और अमेरिका के नेतृत्व में [[पूँजीवाद|पूँजीवादी]] देश दो खेमों में बँट गये। इन दोनों पक्षों में आपसी टकराहट आमने सामने कभी नहीं हुई, पर ये दोनों गुट इस प्रकार का वातावरण बनाते रहे कि युद्ध का खतरा सदा सामने दिखाई पड़ता रहता था। [[बर्लिन संकट]], [[कोरिया युद्ध]], सोवियत रूस द्वारा [[आणविक परीक्षण]], सैनिक संगठन, [[हिन्द चीन की समस्या]], [[यू-2 विमान काण्ड]], [[क्यूबा मिसाइल संकट]] कुछ ऐसी परिस्थितियाँ थीं जिन्होंने शीतयुद्ध की अग्नि को प्रज्वलित किया। सन् [[1991]] में सोवियत रूस के विघटन से उसकी शक्ति कम हो गयी और शीतयुद्ध की समाप्ति हो गयी।
== बर्लिन विवाद ==
[[चित्र:Checkpoint Charlie 1961-10-27.jpg|thumb|right|बर्लिन संकट (१९६१) के समय संयुक्त राज्य अमेरिका एवं सोवियत रूस के टैंक आमने सामने]]
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ही सोवियत संघ का पूर्वी बर्लिन पर तथा अमेरिका तथा ब्रिटेन का पश्चिमी बर्लिन पर अधिकार हो गया था। युद्ध के बाद पश्चिमी ताकतों ने अपने श्रेत्राधीन बर्लिन प्रदेश में नई मुद्रा का प्रचलन शुरू करने का फैसला किया । इस फैसलें के विरुद्ध जून 1948 में बर्लिन की नाकेबन्दी सोवियत संघ ने कर दी। इसके परिणामस्वरूप सोवियत संघ व अमेरिका या ब्रिटेन के बीच हुए प्रोटोकोल का उल्लंघन हो गया। इसके लिए सोवियत संघ को पूर्ण रूप से दोषी माना गया। सोवियत संघ अपना दोष स्वीकार करने को तैयार नहीं था। इससे मामला सुरक्षा परिषद् में पहुंच गया और दोनों महाश्िक्तयोंमहाशक्तियों के मध्य शीतयुद्ध के बादल मंडराने लग गए।
 
== सोवियत संघ द्वारा वीटो पावर का बार-बार प्रयोग किया जाना==
== संकीर्ण राष्ट्रवाद पर आधारित संकीर्ण राष्ट्रीय हित ==
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिका तथा सोवियत संघ अपने अपने स्वार्थों को साधने में लग गए। वे लगातार एक दूसरे के हितों की अनदेखी करते रहे। इससे शक्ति राजनीति का जन्म हुआ। इससे प्रत्येक राष्ट्र एक दूसरे का शत्रु बन गया। दोनों महाशक्तियां अपना अपना प्रभुत्व बढ़ाने के प्रयास में अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का अखाड़ा बन गई। उनके स्वार्थमयी हितों ने धीरे धीरे पूरे विश्व में तनाव का वातावरण पैदा कर दिया।
 
==इन्हें भी देखें==
*[[शीतयुद्ध]]
 
[[श्रेणी:शीतयुद्ध|*]]