"गोल्डन काफ़ (सोने का बछड़ा)": अवतरणों में अंतर

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जब [[मूसा]] दस ईश्वरीय-आदेश ([http://bible.cc/exodus/19-20.htm निर्गमन 19:20]) पाने के लिए माउंट सेनाई (सेनाई पर्वत) पर चले गए तब वे इस्राएल को चालीस दिनों और चालीस रातों के लिए छोड़ गए ([http://bible.cc/exodus/24-18.htm निर्गमन 24:18]). इस्राएल को यह डर सताने लगा कि वे लौट कर नहीं आएंगे और उन्होंने हारून से उनके लिए इस्राएल के ईश्वर की मूर्ति बनाने के लिए कहा ([http://bible.cc/exodus/32-1.htm निर्गमन 32:1]). हालांकि, हारून ने इस्राएल के परमेश्वर का प्रतिनिधि बनने से इनकार कर दिया. इस्राएलियों ने हारून को अभिभूत करने के लिए काफी शिकायत की थी, इसलिए उसने उनका अनुपालन किया और इस्राएलियों के कानों की सोने की बालियां इकट्ठी की. उसने उसे पिघलाया और सोने की एक जवान बैल (सांड़) की मूर्ति बनाई. हारून ने बछड़े के सामने एक वेदी भी बनाई और यह घोषणा भी कर दी कि इस्राएल के लोगों, ये तुम्हारे ईश्वर हैं, जो तुमलोगों का मिस्र की जमीन से बाहर ले आया है". और दूसरे ही दिन, इस्राएलियों ने सोने के बछड़े को भेंट अर्पित की और उत्सव मनाया. मूसा ने जब उन्हें यह सबकुछ करते देखा तो वे उनसे क्रोधित हो गए, उन्होंने उन शिला लेखों को जिसपर ईश्वर ने इस्राएलियों के लिए अपने कानून लिखे थे, ज़मीन पर फेंक दिया.
 
बाद में, ईश्वर ने मूसा से कहा कि उसके लोगों ने अपने आप को पाप में लिप्त कर लिया है, एवं उन्होंने उन्हें नष्ट कर देने की योजना बनाई है और मूसा से ही नए लोगों की शुरुआत करेंगे. हालांकि, मूसा ने तर्क करते हुए यह दलील दी कि उन्हें छोड़ दिया जाना चाहिए ([http://bible.cc/exodus/32-11.htm निर्गमन 32:11]) और ईश्वर ने उसकी यह विनती स्वीकार कर ली. और जब यहोवा ने लोगों के चिल्लाने का शोरगुल सुना, तो उसने मूसा को इसके बारे में बताया. मूसा पर्वत से नीचे उतरे, लेकिन बछड़े को देखकर वे भी क्रोधित हो गए. उन्होंने उन शिला लेखों को ज़मीन पर पटक कर टुकड़े-टुकड़े कर दिया जिनपर ईश्वरीय आदेश लिखे गए थे। मूसा ने सोने के बछड़े को आग में जलाकर पीसकर राख में बदल दिया, जल में छिड़क कर इस्राएलियों को इसे जबरन पीने को कहा. हारून ने सोने के एकत्रित किए जाने की बात स्वीकार की और उसने कहा कि कटी हुई जलती लकड़ियों के बीच फेंक दिए जाने पर बछड़ा बनकर बाहर निकल आया. मूसा ने तब सबको बुलाया जो टोरा के अनुयायी बनने को स्वतः इच्छुक थे। अधिकतर इस्राएल मूसा के पास आए, जिनमें लेवी जनजाति के प्रत्येक सदस्य शामिल थे। मूसा ने लेवियों को अधिसंख्यक लोगों (3000) का क़त्ल कर देने के लिए भेजा जिन लोगों ने मूसा के आह्वान को अस्वीकार कर दिया था। इस्राएलियों पर प्लेग की महामारी का आक्रमण हो गया.गया। ईश्वर के अनुसार, एक दिन वे अवश्य इस्राएलियों के पाप लिए उनके पास आएंगे.
 
जैसा कि मूसा ने शिलालेख तोड़ दिए थे, ईश्वर ने उन्हें माउंट सिनाई ([http://bible.cc/exodus/34-2.htm निर्गमन 34:2]) पर लौट आने का आदेश दिया और टूटे शिलालेखों के बदले दूसरे शिलालेख लेने को बुलाया.
=== पूर्ववर्ती पैगम्बर ===
[[चित्र:Worshiping the golden calf.jpg|thumb|right|स्वर्ण बछड़े को पूज रहे हैं]]
922 ई.पू. में, जब यारोबाम प्रथम ने इस्राएल के उत्तरी राज्य की स्थापना की, उन्होंने दो स्वर्णिम बछड़ो का निर्माण किया और उन्हें बेथेल और दान के मध्य प्रतिस्थापित कर दिया गया.गया। राजाओं में से 1 राजा 12. c26-30 के अनुसार, यारोबाम बालियों के सापेक्ष इस्राएलियों के धार्मिक कर्मकाण्डों का सर्वोक्षण करता है।
 
26 यारोबाम ने मन ही मन विचार किया, "राज्य अब संभवतः दाउद के पास आ जायेगा. 27 के घर की ओर वापस हो जाएगी अगर, इन लोगों ने येरुसलम में जाकर ईश्वर (LORD) के मंदिर बालियां अर्पित नहीं करते, वे लोग पुनः आरोपों को उनके स्वामी यहूदा के राजा रहूबियाम के हवाले कर देंगे. वे मुझे मार डालेंगे और राजा रहूबियाम के पास लौट जाएंगे." 28 सलाह लेने के बाद राजा ने दो स्वर्णिम बछड़े बनवाए. उसने लोगों से कहा, "येरुशलम तक जाना तुम लोगों के वश की बात नहीं. ये लो तुम्हारे इश्वर, इस्राएल, जिन्होंने तुम्हें मिस्र से बाहर लाया." 29 एक को उसने बेथेल में स्थापित कर दिया और दूसरे को दान में. 30 और यही बात पाप हो गई; लोग बेथेल में एक की पूजा करने आए और दूसरे की सुदूर दान में. {{bible verse|1 Kings|12:26-30|NIV}}
एज्रा, इस्राएलियों के बीच बोलते हुए, उनके इतिहास की याद दिलाता है और उनसे ईश्वर की कृपा के बारे में बताता है जिस दर्मियान वे बछड़े से ईश्वर की पूजा करने का प्रयास करते हैं।
 
एज्रा की भाषा "ईश्वर" के संदर्भ में यह दर्शाती है कि इस्राएलियों के दूसरे मामलों और उनका बछड़े के उपयोग के मामलों में कुछ विसंगतियां हैं। निर्गमन के विवरण के अनुसार एवं यहूदा के दक्षिण राज्य में स्थित विधि-विवरण (Deuteronomistic) वेत्ता इतिहासकारों द्वारा लिखित किंग्स 1 संस्करण में, इस्राएलियों के विश्वासघात का पर्दाफाश करने की प्रवृत्ति रही है। यह असंगति मुख्यतः निर्गमन 32.4 पाई गई है जिसमें "देवताओं" को बहुवचन के रूप में दर्शाया गया है बावजूद इसके की एक ही बछड़े का निर्माण हुआ.हुआ। जब एज्रा कहानी को दोहराता है, वह केवल एकल, बड़े अक्षरों में लिखे जाने वाले ईश्वर (God) का उल्लेख करता है।<ref>कुगन, 2009, पृष्ठ. 116-7.</ref>
 
== आलोचना और व्याख्या ==
सोने के बछड़े की कथा के विवरण से जो दूसरी बात समझ में आती है वह यह है कि बछड़े को यहोवा के मंच के रूप में मान लिया गया था। निकट पूर्व की कला में, देवताओं को को अक्सर किसी न किसी सिंहासन पर आसीन.<ref name="coogan115"/> इस विवरण के अध्ययन से तब यह तर्क संगत रूप में मान लिया जा सकता है कि स्रोत का बछड़ा प्रतिज्ञापत्र की मंजूषा अथवा देवदूत का विकल्प मात्र था जिसपर यहोवा सिंहासनासीन था।<ref name="coogan115"/>
 
इस जटिलता के कारण को इस रूप में समझा जा सकता है 1) हारून की आलोचना, याजकों के गृह के प्रतिष्ठाता के रूप में जिसने मूसा के याजक-आवास के साथ प्रतिस्पर्धा की, एवं/अथवा 2.) "इस्राएल के उत्तरी राज्य पर आक्रमण के रूप में."<ref name="coogan115"/> दूसरी व्याख्या "यारोबाम के पाप" आधारित है, जो उत्तरी राज्य का पतन अश्शुर (Assyria) के हाथों 722 ईसा पूर्व (BCE) में हो जाना.<ref name="coogan115"/> यारोबाम का "पाप" था दो सोने के बछड़ों की दृष्टि करना और उनमें से एक को राज्य में दक्षिण की ओर बेथेल में पूजे जाने के लिए भेज देना और दूसरे को राज्य के उत्तरी की ओर दान में पूजे जाने के लिए भेज देना, ताकि उत्तरी राज्य के लोग पूजा करने के लिए येरुशलम की ओर जाना जारी न रखें (देखें 1 किंग्स 12.26-30). कूगन के अनुसार, यह प्रकरण विधि-विधान के विवरण के इतिहास का एक हिस्सा मात्र है, जिसे उत्तरी राज्य, जो उत्तरी राज्य के पक्षपात के खिलाफ था, उसके पतन के पश्चात लिखा गया.गया।<ref name="coogan115"/> कूगन का कहना है कि यारोबाम येरुशलम के मंदिर को करुबों (देवताओं) के विकल्प के रूप में केवल पेश किए जाने के लिए था और इसीलिए बछड़े गैर-यहोवी पूजा की ओर संकेत नहीं करते.<ref name="coogan115"/>
 
आगे इस विवरण की अंतर्कथा समझने के लिए दस्तावेजी अनुमान का उपयोग किया जा सकता है; यह युक्ति है कि सोने के बछड़े की आरंभिक कथा E के द्वारा संरक्षित की गई है और इसका उदमय उत्तरी राज्य में हुआ है। उत्तरी राज्य के पतन के पश्चात जब E और J एक सामान जुड़ते हैं, "उत्तरी राज्य को नकारात्मक आलोक में प्रदर्शित करने के उद्देश्य से कथा का पुनः प्रारूप प्रदान किया गया" और बछड़े की पूजा को "बहुदेववाद" के रूप में चित्रित किया गया, जिसमें "यौनाचार के साथ नंगे नाच का भी सुझाव था (देखें निर्गमन 32.6). कथा विवरणों को एकत्रित किया जाता है, हो सकता है P ने इस मामले में हारून के अपराध को कम कर दिया हो, लेकिन बछड़े के साथ जुड़ी नकारात्मक को बरकरार संरक्षित रखा गया.गया।<ref name="coogan115"/>
 
== कुरानी संस्करण ==