"बिहार का मध्यकालीन इतिहास" के अवतरणों में अंतर

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== [[तुगलक वंश]] ==
तुगलक वंश की स्थापना गयासुद्दीन तुगलक (गाजी मलिक ) ने १३२० ई. में दिल्ली सुल्तान खुसराव खान का अन्त करके की।
 
गयासुद्दीन का अन्तिम सैन्य अभियान बंगाल विजय थी। उसने १३२४ ई. में बंगाल-बिहार के लिए सैन्य अभियान भेजा। लखनौती शासक नसीरुद्दीन ने समर्पण कर दिया परन्तु सोनार गाँव के शासक गयासुद्दीन बहादुर ने विरोध किया, जिसे पराजित कर दिल्ली भेज दिया गया।
तुगलक काल में बिहार की राजधानी बिहार शरीफ थी। बिहार राज्य का बिहार नाम भी इसी काल में पड़ा था। इस काल में बिहार के प्रशासकों में सबसे महत्वपूर्ण मलिक इब्राहिम था। बिहार शरीफ पहाड़ी पर स्थित इनका मकबरा तुगलक कालीन स्थापत्यकला का मन्दिर उदाहरण है
 
१३८८ ई. में फिरोजशाह तुगलक की मृत्यु के बाद मध्यकालीन बिहार का दिल्ली सल्तनत में विघटन प्रक्रिया शुरु हो गई। फिरोजशाह के उत्तराधिकारी निष्क्रमण और कमजोर थे जो बिहार पर नियन्त्रण न रख सके। यही स्थिति दिल्ली सुल्तान सैयद वंश के शासकों में रही फलतः बिहार का क्षेत्र जौनपुर राज्य के अधीन हो गया। जौनपुर में शर्की वंशीय शासक थे जिससे जौनपुर और दिल्ली में संघर्ष प्रारम्भ हो गया। अन्तिम शर्की शासक हुसैन शाह शर्की (१४५८-१५०५ ई.) के समय बिहार भी संघर्ष में फँसा रहा। १४८९ ई. में जौनपुर पर लोंदी वंश का अधिकार होने के बाद बिहार में नुहानी वंश का उदय हुआ।
 
== [[चेरो राजवंश]] ==