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== लक्षण ==
ललित काव्य की एक विधा का रूप धारण कर महाकाव्य [[साहित्यशास्त्र]] का विषय बन गया और आचार्यों ने [[साहित्य]] की अन्य विधाओं की भाँति उसे भी लक्षणवद्ध कर दिया। [[यूरोप]] में [[अरस्तू]], [[इतालवी भाषा]] के कतिपय आचार्यों, बाद में डॉ०डॉ॰ जॉन्सन आदि और आधुनिक युग में अनेक काव्य-मर्मज्ञों ने महाकाव्य का स्वरूप-विवेचन किया है। भारत में प्राचीनों में [[भामह]], [[दंडी]], [[रुद्रट]] और [[विश्वनाथ]] आदि ने विस्तार के साथ महाकाव्य के लक्षण प्रस्तुत किए हैं और आधुनिक साहित्य-मर्मज्ञों ने भी भारतीय तथा पाश्चात्य काव्य-चिंतन के आलोक में उसके स्वरूप का तात्विक विवेचन किया है।
 
उपर्युक्त तत्त्व-विवेचन का सार-संक्षेप सामान्यः इस प्रकार है-