"लघुगणक" के अवतरणों में अंतर

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: <math>\log_b x = n\Leftrightarrow\ x = b^n\,</math>
 
यह परिभाषा तभी वैध है जब आधार ''b'', 1 के अलावा कोई अन्य धनात्मक वास्तविक संख्या हो, अर्थात् ''b''> 0 y ''b'' ≠ 1, ''x'' कोई भी धनात्मक वास्तविक संख्या हो ( ''x'' > 0 ) तथा ''n'' कोई भी वास्तविक संख्या हो (''n'' ∈ '''R''')।
 
प्रत्येक लघुगणक का आधार होना आवश्यक है। भिन्न भिन्न आधारों के लिए एक ही संख्या के भिन्न भिन्न लघुगणक होते हैं। साधारणत: आधार के लिए दो संख्याओं का व्यवहार होता है, जिनके अनुसार लघुगणक की दो प्रणालियाँ बनाई गई हैं।
'''अपूर्णांश ज्ञात करने का नियम''' निम्नलिखित हैं :
 
अपूर्णांश संख्या के मान और उसमें व्यवहृत अंकों के क्रम पर निर्भर करता है। यदि दो संख्याओं में एक ही प्रकार के अंक एक ही क्रम में व्यवहृत हों और केवल दशमलव बिंदु का स्थान भिन्न हो, तो उन संख्याओं के अपूर्णांश एक ही होंगे, क्योंकि अपूर्णांश संख्या में दशमलव बिंदु के स्थान पर निर्भर नहीं होता है। उदाहरण के लिये ४५३८ और ४५.३८ दोनो के अपूर्णांश समान होंगे यद्यपि दोनो के अपूर्णांश अलग-अलग (क्रमशः ३ तथा १ ) होंगे।
 
== इतिहास ==
संगणन में यह अधिक लाभप्रद नहीं है। 1695 ई. में जॉन वालिस ने निम्नलिखित अनंत श्रेणी का प्रयोग किया :
 
: (1/2) Log ( ( 1+x) / (1-x) ) = x + x<sup>3</sup> / 3 + x<sup>5</sup> / 5 + ...
 
इस श्रेणी की अभिसृति शीघ्रतर है। 1794 ई. में जी.एफ. भेगा द्वारा लिखित थिसॉरस (Thesaurus) में य = (2र>sup>2</sup>-1)<sup>-1</sup> मानकर श्रेणी की अभिसृति अधिक शीघ्रतर कर दी गई है।