"समर्थ रामदास" के अवतरणों में अंतर

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== व्यक्तित्व ==
समर्थ जी का व्यक्तित्व भक्ति ज्ञान वैराग्य से ओतप्रोत था। मुखमण्डलपर दाढ़ी तथा मस्तकपर जटाएं, भालप्रदेश पर चन्दन का टिका रहता था। उनके कंधेपर भिक्षा के लिए झोली रहती थी। एक हाथ में जपमाला और कमण्डलु तथा दूसरे हाथ में योगदण्ड (कुबड़ी ) होती थी।पैरोंमें लकड़ी कि पादुकाए धारण करते थे। योगशास्त्र के अनुसार उनकी भूचरी मुद्रा थी। मुखमें सदैव रामनाम का जाप चलता था और बहुत कम बोलते थे।वे संगीत के उत्तम जानकार थे। उन्होनें अनेको रागोमें गायी जानेवाली रचनाएं कि हैं। आप प्रतिदिन १२०० सूर्यनमस्कार लगाते थे इस कारण शरीर अत्यंत बलवान था।जीवन के अंतिम कुछ वर्ष छोड़कर पूरे जीवम में वे कभी एक जगह पर नहीं रुके। उनका वास्तव्य दुर्गम गुफाएं,पर्वत शिखर,नदी के किनारें तथा घने अरण्यमें रहता था। ऐसा समकालीन ग्रंथमें उल्लेख है।
 
== ग्रन्थरचना==
* [http://www.dasbodh.com दासबोध,आत्माराम, मनोबोध व अन्य समर्थ वाङमय अनेक भाषाओंमे यहां उपलब्ध है।]
* [http://www.prabhasakshi.com/ShowArticle.aspx?ArticleId=120223-105103-320010 छत्रपति शिवजी के गुरु थे समर्थ स्वामी रामदास]
* [http://www.dasbodh.com/ दासबोध.कॉम ( फ्री डाउनलोड )]
* [http://www.yogirajkalyanswami.com/ कल्याण स्वामी के बारे में वेबसाईट]
* [http://www.samarthramdas400.in/eng/home.php समर्थ रामदास के बारे में वेबसाईट ]