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'''खरगोन''' भारत देश में [[मध्य प्रदेश]] राज्य का [[जिला]] है।इसकाहै। इसका मुख्यालय [[खारगोन]] है।
 
== भूगोल ==
== आवागमन ==
यह जिला [[इंदौर]], [[खण्डवा]], [[बड़वानी]], [[धार]], [[झाबुआ]], धुळै ([[धूलिया]]), जळगाव ([[जलगांव]]) से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा है। [[आगरा]] - [[मुंबई]] [[राष्ट्रीय राजमार्ग]] क्रमांक 3 इस जिले से गुज़रता है। जिले के पूर्वी भाग से मीटर गेज रेल्वे मार्ग जाता है जो कि [[दिल्ली]] - [[जयपुर]] - [[इंदौर]] - [[खण्डवा]] - [[हैदराबाद]] मार्ग है। इस रेल्वे मार्ग पर महत्वपूर्ण स्टेशन बड़वाह एवं सनावद हैं। खण्डवा ब्रॉड गेज का सबसे पास का स्टेशन तथा इंदौर सबसे पास का हवाई अड्डा है।काशहै। काश कि इस जिले में रेल की सुविधा होती तो यह क्षेत्र प्रगति का शिखर चूम रहा होता |
 
== प्रशासनिक-भाग ==
* '''[[खरगोन]]''' - जिला मुख्यालय - कुंदा नदी के तट पर बसा यह शहर अत्यंत प्राचीन नवग्रह मन्दिर के लिये प्रसिद्ध है। यह शहर इंदौर (रेल्वे / हवाई अड्डा) से 143 कि.मी., बड़वानी से 90 कि.मी. (गुजरात से आते हुए - राज्य महामार्ग 26), सेंधवा से 70 कि.मी. (महाराष्ट्र से आते हुए - आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं. 3), धामनोद से 65 कि.मी. (इंदौर से आते हुए - आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं. 3), धार से 130 कि.मी., खण्डवा से 90 कि.मी. तथा बुरहानपुर से 130 कि.मी. दूरी पर है। यह शहर कपास एवं जिनिंग कारखानों का एक प्रमुख केन्द्र है।
* '''[[महेश्वर]]''' - यह शहर हैहयवंशी राजा सहस्रार्जुन, जिसने रावण को पराजित किया था, की राजधानी रहा है। ऋषि जमदग्नि को प्रताड़ित करने के कारण उनके पुत्र भगवान परषुराम ने सहस्रार्जुन का वध किया था। कालांतर में महान देवी अहिल्याबाई होल्कर की भी राजधानी रहा है। नर्मदा नदी के किनारे बसा यह शहर अपने बहुत ही सुंदर व भव्य घाट तथा माहेश्वरी साड़ियों के लिये प्रसिद्ध है। घाट पर अत्यंत कलात्मक मंदिर हैं जिनमे से राजराजेश्वर मंदिर प्रमुख है। आदिगुरु शंकराचार्य तथा पंडित मण्डन मिश्र का प्रसिद्ध शास्त्रार्थ यहीं हुआ था। यह जिले की एक तहसील का मुख्यालय भी है।
* '''[[मण्डलेश्वर]]''' - महेश्वर से 8 कि.मी. दूर यह शहर भी नर्मदा के किनारे ही बसा है। नर्मदा पर जल-विद्युत परियोजना व बांध का निर्माण हुआ है।इसहै। इस नगर में दत्त मंदिर राम मंदिर, गुप्तेश्वर मंदिर शीतला माता मंदिर काशी विश्वेवर मंदिर एंड छप्पन देव मंदिर अत्यंत प्राचीन होकर दर्शनीय है यहाँ फांसी बैड्डी नामक स्थान पर अनेक देशभक्तों को १८५७ की क्रांति के समय फांसी दी गयी ऐसी किवदंती है मण्डलेश्वर से ८ किमी के अंतर पर ग्राम चोली बड़ा ही ऐतिहासिक ग्राम है यहाँ पांडव युगीन महादेव का मंदिर बड़ा गणपति और चौसठ योगिनीं मंदिर इसकी प्राचीनता को बयां करते है|चोली नामक स्थान पर अत्यंत प्राचीन शिव-मंदिर है जहां पर बहुत भव्य शिव-लिंग स्थित है।
* '''[[ऊन, मध्य प्रदेश|ऊन]]''' - यह स्थान खरगोन से 14 कि.मी. दूरी पर है। परमार-कालीन शिव-मंदिर तथा जैन मंदिरों के लिये यह स्थान प्रसिद्ध है। एक बहुत प्राचीन लक्ष्मी-नारायण मंदिर भी यहां स्थित है। खजुराहो के अलावा केवल यहीं परमार-कालीन प्रचीन मंदिर हैं।
* '''[[बकावां]]''' एवं '''[[रावेरखेड़ी]]''' - महान पेशवा बाजीराव की समाधी रावेरखेड़ी में स्थित है। उत्तर भारत के लिए एक अभियान के समय उनकी मृत्यु यहीं नर्मदा किनारे हो गई थी। बकावां में नर्मदा के पत्थरों को तराश कर शिव-लिंग बनाए जाते हैं।