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जब शरीर का ताप सामान्य से अधिक हो जाये तो उस दशा को '''ज्वर''' (फीवर) कहते है। यह रोग नहीं बल्कि एक लक्षण (सिम्टम्) है जो बताता है कि शरीर का ताप नियंत्रित करने वाली प्रणाली ने शरीर का वांछित ताप (सेट-प्वाइंट) १-२ डिग्री सल्सियस बढा दिया है।मनुष्यहै। मनुष्य के शरीर का सामान्‍य तापमान ३७°[[सेल्सियस]] या ९८.६° [[फैरेनहाइट]] होता है। जब शरीर का [[तापमान]] इस सामान्‍य स्‍तर से ऊपर हो जाता है तो यह स्थिति ज्‍वर या बुखार कहलाती है। ज्‍वर कोई रोग नहीं है। यह केवल रोग का एक लक्षण है। किसी भी प्रकार के संक्रमण की यह शरीर द्वारा दी गई प्रतिक्रिया है। बढ़ता हुआ ज्‍वर रोग की गंभीरता के स्‍तर की ओर संकेत करता है।
 
== कारण ==
रोगी को अच्‍छे हवादार कमरे में रखना चाहिये। उसे बहुत सारे द्रव पदार्थ पीने को दें। स्‍वच्‍छ एवं मुलायम वस्‍त्र पहनाऍं, पर्याप्‍त विश्राम अति आवश्‍यक है। यदि ज्‍वर 39.5 डिग्री से. या 103.0 फैरेनहाइट से अधिक हो या फिर 48 घंटों से अधिक समय हो गया हो तो डॉक्‍टर से परामर्श लें।
 
इसके अलावा रोगी को खूब सारा स्‍वच्‍छ एवं उबला हुआ पानी पिलाएं, शरीर को पर्याप्‍त कैलोरिज देने के लिये, ग्‍लूकोज, आरोग्‍यवर्धक पेय (हेल्‍थ ड्रिंक्‍स), फलों का रस आदि लेने की सलाह दी जाती है।आसानीहै। आसानी से पचनेवाला खाना जैसे चावल की कांजी, साबूदाने की कांजी, जौ का पानी आदि देना चाहिये। दूध, रोटी एवं डबलरोटी (ब्रेड), माँस, अंडे, मक्‍खन, दही एवं तेल में पकाये गये खाद्य पदार्थ न दें।
 
;जई (ओटस्)
* [http://hindi.webdunia.com/miscellaneous/health/ayurvedic/0708/01/1070801019_1.htm ज्वर या बुखार : आयुर्वेदिक उपचार] (वेबदुनिया)
* [http://healandhealth.com/hi/%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%82/ बुखार के कहर से बचें] (हील एण्ड हेल्थ)
* [http://akbaranwal.blogspot.com/2009/07/104-105-5-10-1-2-3-4-4-3-4-aconite.html होम्योपैथिक और ज्वर]।{{हिन्दी चिह्न}}।[[२० जुलाई]], [[२००९]]।अकबरनवाल। अकबरनवाल
 
[[श्रेणी:लक्षण]]