"धर्म के लक्षण" के अवतरणों में अंतर

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: '''धीर्विद्या सत्‍यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्‌।।''' (मनुस्‍मृति ६.९२)
 
''(धैर्य, क्षमा, संयम, चोरी न करना, शौच (स्वच्छता), इन्द्रियों को वश मे रखना, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना ; ये दस धर्म के लक्षण हैं।)''
 
== याज्ञवक्य ==
: '''दानं दमो दया शान्‍ति: सर्वेषां धर्मसाधनम्‌।।'''
''(अहिंसा, सत्य, चोरी न करना (अस्तेय), शौच (स्वच्छता), इन्द्रिय-निग्रह (इन्द्रियों को वश में रखना), दान, संयम (दम), दया एवं शान्ति)''
 
== श्रीमद्भागवत ==
: '''आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।।''' (पद्मपुराण, शृष्टि 19/357-358)
 
('''अर्थ:''' धर्म का सर्वस्व क्या है, सुनो ! और सुनकर इसका अनुगमन करो। जो आचरण स्वयं के प्रतिकूल हो, वैसा आचरण दूसरों के साथ नहीं करना चाहिये।)
 
== वाह्य सूत्र ==