"नालन्दा महाविहार" के अवतरणों में अंतर

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नालंदा शिक्षा और ज्ञान-विज्ञान का प्रचीनतम केंद्र रहा है तथा कभी महान विश्वविद्यालय रहे इस विख्यात नालंदा के पुरावशेषों को [[यूनेस्को विश्व धरोहर]] बनाया जा सकता है। इस संबंध में [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण]] ने [[यूनेस्को]] को अपनी सिफारिश भेज दी है। [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण]] ने नालंदा पुरावशेष प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और पुरावशेष अधिनियम १९५८ के तहत संरक्षित स्थल घोषित किया है। इस स्थान की मूल सामग्रियों से ही इसकी मरम्मत कराई गई है। यह पूरा प्रयास किया गया कि मूल रूप ना बदले।
 
युनेस्को अधिकारियों के अनुसार नालंदा स्थित मंदिर संख्या तीन का निर्माण पंचरत्न स्थापत्य कला से किया गया है। यह दक्षिण-पूर्व एशिया के कई स्थलों के अलावा कंबोडिया के [[अंकोरवाट मंदिर]] से मेल खाता है। इसके अलावा नालंदा और तक्षशिला में भी काफी समानताएं हैं। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अतुल्य भारत अभियान के साथ मिल कर एनडीटीवी द्वारा आयोजित एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण के तहत [[कोणार्क सूर्य मंदिर]], [[मीनाक्षी मंदिर]], [[खजुराहो]], [[लाल किला, दिल्ली]], [[जैसलमेर दुर्ग]], नालंदा विश्वविद्यालय और [[धौलावीर]] जैसे स्थलों को [[भारत के सात आश्चर्य]] के रूप में चुना गया है।<ref name="ताऊ">http://taau.taau.in/2009/06/25.html</ref>
 
नालंदा विश्वविद्यालय के नाम पर एक नए [[विश्वविद्यालय]] की स्थापना की जा रही है। प्रसिद्ध [[नोबल पुरस्कार]] विजेता साहित्यकार [[अमर्त्य सेन]] के अनुसार वर्ष २०१० तक शैक्षणिक सत्र भी आरंभ हो जाएगा। इसके पुनर्जीवन प्रयास में सिंगापुर, चीन, जापान व दक्षिण-कोरिया ने भी सहयोग देने का वादा किया है। इसके ऊपर संसद में विधेयक पारित होने पर इसके भवन का निर्माण भी शुरु हो जाएगा। इसमें ईस्ट एशिया सम्मेलन के १६ देश आर्थिक सहयोग देंगे।<ref name="अमर्त्य">