"अण्डमानी लोग" के अवतरणों में अंतर

1 बैट् नीकाले गए ,  6 वर्ष पहले
छो
बॉट: दिनांक लिप्यंतरण और अल्पविराम का अनावश्यक प्रयोग हटाया।
छो (बॉट: डॉट (.) के स्थान पर पूर्णविराम (।) और लाघव चिह्न प्रयुक्त किये।)
छो (बॉट: दिनांक लिप्यंतरण और अल्पविराम का अनावश्यक प्रयोग हटाया।)
मोपला लोग केरल में कालीकट के समीप मालाबार तट के निवासी हैं। यह क्षेत्र कालीमिर्च के व्यापार का प्रसिद्ध केन्द्र है। नवीं शताब्दी में कुछ मुसलमान सौदागर अरब से आकर मालाबार में रहने लगे और स्थानीय हिन्दू द्रविड़ महिलाओं से विवाह कर लिया। ऐसे दम्पति के वशंज, मोपला कहे जाने लगे। ये लोग हिन्दू राजा को कर अदा करते थे, परन्तु पक्के सुन्नी मुसलमान थे। वे तुर्किस्तान के खलीफा को अपना धर्म गुरू मानते थे।
 
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने तुर्किस्तान के सुलतान के पक्ष में "खिलफत का आन्दोलन" छेड़ा तो मोपला भी अंग्रेजों के विरुद्ध उठ खड़े हुए। बड़ी संख्या में मोपला आन्दोलनकारियों ने सरकारी थानों पर धरना देना शुरु कर दिया। वे हिन्दू जमीदारों को कर देते थे और इस आन्दोलन ने कुछ सीमा तक साम्प्रदायिक रूप भी ले लिया। ब्रिटिश सरकार मोपला नेताओं को पकड़ने में असफल रही। प्राय: हजारों मोपला आन्दोलनकारी सरकारी अधिकारिओं के निवास-स्थानों, रेलवे स्टेशनों, डाकखानों, शराब की दुकानों तथा अन्य स्थानों पर हमला करने लगे थे। इस लोगों ने मुहम्मद हाजी को `खिलाफत बादशाह' की उपाधि दे दी। हिन्दुओं को काफिर घोषित करके उनके घरों को लूटा जाने लगा। अनेक हिन्दू-महिला-पुरुषों का जबरदस्ती धर्म-परिवर्तन कर दिया गया। २५ जुलाई, १९२१ को पुलिस और ५००० मोपला आन्दोलनकारियों की भिड़न्त में एक ब्रिटिश फौजी अधिकारी और एक पुलिस अधिकारी की हत्या कर दी गई। फौज के दो अधिकारी और कई जवान मारे गए। एक रेलवे स्टेशन में आग लगाकर रेलवे लाइन तोड़ दी गई। आंतक के इस वातावरण को समाप्त करने के लिए गोरखे, गढ़वाली और बर्मी फौजियों को आना पड। अकेले पंडिक्का थाने पर संघर्ष में २१६ मोपला विद्रोही मारे गए और एक अंग्रेज अफसर तथा आठ सिपाही और दो गोरखा अधिकारी तथा २७ अन्य सैनिक मारे गए।
 
मोहम्मद हाजी और उसके २१ साथियों को पकड़ कर कोर्ट मार्शल के बाद गोली से उड़ा दिया गया। इस संघर्ष में २,२६६ मोपला मारे गए और १,६१५ घायल हुए तथा ५,६८८ को गिरफ्तार कर लिया गया। कुल मिलाकर ३८,२५६ मोपला विद्रोहियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। अंग्रेजों द्वारा बदले की कार्यवाही में कलकत्ते की कालकोठरी वाली घटना को फिर से दोहराया गया। कासलीकट से मद्रास जाने वाली एक मालगाड़ी के डब्बे में १०० मोपला बन्द कर दिए गए थे। भीषण गर्मी में मद्रास पहुंचने पर जब मालगाड़ी का डब्बा खोला गया तो ६६ मोपला मर चुके थे और शेष की दशा गम्भीर थी।