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वॉटसन को 2002 में पहली बार तस्मानिया के लिए पूरा कप में‍ सबसे अधिक विकेट लेने और मध्य क्रम में बल्लेबाजी के उनके स्थायी प्रदर्शन को देखते हुए, दक्षिण अफ़्रीका के दौरे के लिए ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम में चुना गया। ऑस्ट्रेलिया के कप्तान रह चुके स्टीव वॉ ने अपने कार्यकाल के दौरान कहा था कि वॉटसन 1950 के दशक के कीथ मिलर और एलन डेविडसन के बाद संभवतः पहले वास्तविक ऑलराउंडर बन सकते हैं। वॉटसन ने अपने आदर्श, वॉ के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम में चुने जाने पर बहुत खुश थे। वॉटसन ने अभ्यास मैचों के दौरान अपने पहले मैच मेँ नाबाद शतक बनाया था, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सत्र मेँ दक्षिण अफ्रीका को 3-0 से पराजित करने वाली टीम के ग्यारह सदस्योँ को ही चयनकर्ताओं द्वारा प्राथमिकता दिए जाने के कारण, वे टेस्ट मैचों में नहीँ खेल सके। वॉटसन को इस दौरे में अपने वनडे कैरियर की शुरुआत करने का मौका मिला, जब उन्हें वॉ के स्थान पर खेलने के लिए मैदान मेँ उतारा गया, वॉ को ऑस्ट्रेलियाई सत्र के दौरान वनडे के फाइअनल में टीम के जगह बना पाने में विफल होने के कारण टीम से बाहर रखा गया था। 2003 मेँ पीठ में तीन चोटे लगने से पहले तक वॉटसन वनडे टीम के नियमित सदस्य बन चुके थे, चोट के कारण ही वे 2003 क्रिकेट विश्व कप में नहीँ खेल पाए. उनका स्थान उनके टीम क्वींसलैंड के ही सदस्य [[एन्ड्र्यू सायमन्ड्स|एंड्रयू सायमंड्स]] ने लिया, जिन्होंने टुर्नामेंट के दौरान 143* और 91* की पारी खेल कर एक सफल ऑल राउंडर के रूप में स्थापित कर दिया.
 
वॉटसन अपनी चोट के कारण आस्ट्रेलिया के 2003-04 सत्र से बाहर रहे और अपने पुनर्वास के दौरान, वे अपनी बल्लेबाजी की क्षमता को बेहतर करने लिए सत्र के अधिकांश मैंचों में बल्लेबाज के रूप में खेलते दिखे, उस समय भी उनकी पीठ की चोट ठीक नहीं हुई थी। उस दौरान, उन्होंने अपने क्लब साइड, लिंडिसफ़ार्म के लिए खेलते हुए 300 रनों की जोरदर पारी खेली.
 
वॉटसन ने 2004-05 सत्र में वनडे में गेंदबाज ऑल राउंडर के रूप में पुनर्वापसी की. ऑस्ट्रेलिया के [[सिडनी क्रिकेट मैदान|सिडनी क्रिकेट ग्राउंड]] की सूखी पिच पर दो स्पिनरों और तीन तेज़ गेंदबाज के साथ उतरने का फैसला करने के कारण, वॉटसन पाकिस्तान के विरूद्ध तीसरे टेस्ट में भी खेले।