"श्लेष अलंकार" के अवतरणों में अंतर

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सम्पादन सारांश रहित
 
'''रहिमन पानी राखिये,बिन पानी सब सून।<br />
'''पानी''' गये न ऊबरै, मोती मानुष चून।।'''
 
यहाँ पानी का प्रयोग तीन बार किया गया है, किन्तु दूसरी पंक्ति में प्रयुक्त '''पानी''' शब्द के तीन अर्थ हैं -