"उर्दू साहित्य" के अवतरणों में अंतर

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[[उर्दू]] [[भारत]] तथा [[पाकिस्तान]] की आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं में से एक है। इसका विकास मध्ययुग में उत्तरी भारत के उस क्षेत्र में हुआ जिसमें आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पूर्वी पंजाब सम्मिलित हैं। इसका आधार उस [[प्राकृत]] और [[अपभ्रंश]] पर था जिसे '[[शौरसेनी]]' कहते थे और जिससे [[खड़ीबोली]], [[ब्रजभाषा]], [[हरियाणवी|हरियाणी]] और [[पंजाबी]] आदि ने जन्म लिया था। मुसलमानों के भारत में आने और [[पंजाब]] तथा [[दिल्ली]] में बस जाने के कारण इस प्रदेश की बोलचाल की भाषा में [[फारसी]] और [[अरबी]] शब्द भी सम्मिलित होने लगे और धीरे-धीरे उसने एक पृथक् रूप धारण कर लिया। मुसलमानों का राज्य और शासन स्थापित हो जाने के कारण ऐसा होना स्वाभाविक भी था कि उनके धर्म, नीति, रहन-सहन, आचार-विचार का रंग उस भाषा में झलकने लगे। इस प्रकार उसके विकास में कुछ ऐसी प्रवृत्तियाँ सम्मिलित हो गईं जिनकी आवश्यकता उस समय की दूसरी भारतीय भाषाओं को नहीं थी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली में बोलचाल में खड़ीबोली का प्रयोग होता था। उसी के आधार पर बाद में उर्दू का साहित्यिक रूप निर्धारित हुआ। इसमें काफी समय लगा, अत: देश के कई भागों में थोड़े-थोड़े अंतर के साथ इस भाषा का विकास अपने-अपने ढंग से हुआ।