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{{ज्ञानसन्दूक रोयलटी
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|name नाम= बालाजी विश्वनाथ भट
|image तस्वीर= Peshwa Balaji Vishwanath.jpg
| imgw तस्वीर_आकार= 230px
|शीर्षक=बालाजी विश्वनाथ भट
|caption =
 
| succession = [[File:Flag of the Maratha Empire.svg|border|22x20px]] भट परिवार का प्रथम मराठा पेसवा
|उत्तराधिकार=[[File:Flag of the Maratha Empire.svg|border|22x20px]]
|reign = 17 नवम्बर 1713 – 12 अप्रैल 1720
|अधिक succession जानकारी= [[File:Flag of the Maratha Empire.svg|border|22x20px]] भट परिवार काके प्रथम मराठा पेसवा
|predecessor= परशुराम ट्रिम्बक कुलकर्णी
|राज= १७ नवंबर १७१३– १२ अप्रैल १७२०
|successor =पेशवा बाजीराव प्रथम
|predecessorपूर्वाधिकारी= परशुराम ट्रिम्बक कुलकर्णी
|Other titles =सेना कार्ते-पुणे के सुबेदार (1695–1702), दौलतबाद के सर-सुबेदार (1702–1707)
|successor उत्तराधिकारी=पेशवा बाजीराव प्रथम
|spouse =राधाबाई
 
|issue =बाजीराव प्रथम <br /> चिमनाजी अप्पा<br /> भिवभाई जोशी <br /> अनुभाई गोरपड़े
|spouse पत्नी=राधाबाई
|full name =पंतप्रधान श्रीमंत बालाजी (बालाल) विश्वनाथ भट पेशवा
|सन्तान=पेशवा बाजीराव प्रथम<br>चिम्णाजी अप्पा<br>भिऊबाई जोशी<br>अनुबाई घोरपडे
| house = भट
|full nameपूरा नाम=पंतप्रधान श्रीमंत बालाजी (बालालबल्लाल) विश्वनाथ भट(भट्ट) देशमुख पेशवा
| dynasty = पेशवा
|मातृ भाषा=मराठी
|father =विश्वनाथपंत (विसाजी) भट
|कुल=(भट्ट) देशमुख
|mother =अज्ञात
|पिता=विश्वनाथपणंत विसाजी (भट) देशमुख
|birth_date = {{Birth date|1662|1|1|df=y}}
 
|birth_place =शिवर्धन, [[कोंकण]]
|जन्म_तिथि=१ जनवरी १६६२
|death_date = {{Death date and age|1720|4|12|1662|1|1|df=y}}
|जन्म_स्थान=श्रीवर्धन, कोंकण
|death_place =सासवड, [[महाराष्ट्र]]
|मौत की तारीख=१२ अप्रैल १७२०
|place of cremation =सासवड
|death_placeमृत्यु जगह=सासवडसास्वड, [[महाराष्ट्र]]
| religion = [[हिन्दू]]
 
|}}
|धर्म= [[हिन्दू]]-[[ब्राह्मण]]
|}}
''' बालाजी विश्वनाथ''' (1662–1720) प्रथम ''[[पेशवा]]'' (प्रधानमंत्री के लिए [[मराठी भाषा|मराठी]] शब्द) थे। , इन्हें प्रायः '''पेशवा बालाजी विश्वनाथ''' के नाम से जाना जाता है। ये एक ब्राह्मण परिवार से थे और १८वीं सदी के दौरान [[मराठा साम्राज्य]] का प्रभावी नियंत्रण इनके हाथों में आ गया। बालाजी विश्वनाथ ने [[शाहुजी]] की सहायता की और राज्य पर पकड़ मजबूत बनायी। इसके पहले आपसी युद्ध तथा [[औरंगजेब]] के अधीन मुगलों की आक्रमणों के कारण मराठा साम्राज्य की स्थिति कमजोर हो चली थी।
 
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