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* फ़रिशतों, पूर्व अम्बिया (नबी का बहुवचन) और पुस्तकों पर विश्वास।
 
उपरोक्त बातों पर विश्वास करने को मुसलमान कहते हैं। उनके अलावा अन्य मतभेद फरोइई और राजनीतिक हैं।
 
मुसलमान का प्रत्येक कार्य या अमल अल्लाह को प्रसन्न करने के लिये होना चाहिए। जैसे नमाज़ अदा करना, रोज़ा, प्रत्येक (हरेक) इबादत (अल्लाह की सारी इबादत) तथा व्यापार, दैनिक जीवन का प्रत्येक अमल अल्लाह को प्रसन्न करने की नियत से किया जाना चाहिए।
 
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