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Naigarhiya नईगढ़िया मध्यप्रदेश के रायसेन जिला के अन्तर्गत आता हैं इस ग्राम को प्राचीन नगर के रूप में जाना जाता हैं प्राचीन तथ्यो के अनुसार यह नगर यादव राज्य था यहाँ पर प्रतापी राजा हुए यहाँ पर प्राचीन किले के भवनावशेष हे किले कि प्राचीर से लगा हुआ एक तालाब भी हैं जो उसी समय का हे। सन १९४७ के पुर्व यहाँ गुलामी के विरुद्ध कुछ विद्रोह भी हुए जिनकों दबाने के लिये सेनिक कार्यवाही की गई। यह क्षेत्र भोपाल नवाब के अधिन था। ओर भोपाल नवाब के द्वारा जब अधिक कर वसूला जाने लगा तो गढ़िया राज्य के किसानों के द्वारा विद्रोह किया गया। जिसका नेतृत्व राजा उदयसिंह यादव ने किया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यहाँ से लोगों का पलायन होने लगा। क्योंकि राज परिवार में संकीर्ण सोच होने के कारण लोगों को प्रताड़ित किया जाने लगा। जिससे लोगों का पलायन बड़ी तेजी से हुआ। ओर एक नगर गांव में तवदील हो गया। नगर में जो शिक्षा के केन्द्र थे वह नष्ट हो गये। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यहाँ पर भारत सरकार ने सन १९५० में एक माध्यमिक शाला खोली जिससे लोगों में अपने अधिकारियों को जानने लगे पर राज परिवार की संकीर्ण सोच ने शिक्षा का प्रसार रोक दिया। धीरे धीरे लोगों के अन्दर अपने अधिकारो का ज्ञान हुआ। ओर लोगों ने शिक्षा के लिये प्रयास किये। ओर सन २००६ में नगरिकों के प्रयास से हाईस्कूल हुआ। अब जनता अपने अधिकारो को जानने लगी।
{{दृष्टिकोण}}
नईगढ़िया ('''अंग्रेज़ी''' में: Naigarhiya) मध्यप्रदेश के रायसेन जिला के अन्तर्गत आता हैं। इस ग्राम को प्राचीन नगर के रूप में जाना जाता है। प्राचीन तथ्यो के अनुसार यह नगर यादव राज्य था। यहाँ पर प्रतापी राजा हुए। यहाँ पर प्राचीन किले के भवनावशेष हैं। किले की प्राचीर से लगा हुआ एक तालाब भी है जो उसी समय का हे।
 
==विद्रोह==
सन १९४७ के पुर्व यहाँ गुलामी के विरुद्ध कुछ विद्रोह भी हुए जिनको दबाने के लिये सैनिक कार्यवाही की गई।
 
==भोपाल के नवाबों के राज्य का हिस्सा==
यह क्षेत्र भोपाल के नवाबों के अधीन था। ओर भोपाल नवाब के द्वारा जब अधिक कर वसूला जाने लगा तो गढ़िया राज्य के किसानों के द्वारा विद्रोह किया गया। जिसका नेतृत्व राजा उदयसिंह यादव ने किया।
 
==स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद का दृश्य==
Naigarhiya नईगढ़िया मध्यप्रदेश के रायसेन जिला के अन्तर्गत आता हैं इस ग्राम को प्राचीन नगर के रूप में जाना जाता हैं प्राचीन तथ्यो के अनुसार यह नगर यादव राज्य था यहाँ पर प्रतापी राजा हुए यहाँ पर प्राचीन किले के भवनावशेष हे किले कि प्राचीर से लगा हुआ एक तालाब भी हैं जो उसी समय का हे। सन १९४७ के पुर्व यहाँ गुलामी के विरुद्ध कुछ विद्रोह भी हुए जिनकों दबाने के लिये सेनिक कार्यवाही की गई। यह क्षेत्र भोपाल नवाब के अधिन था। ओर भोपाल नवाब के द्वारा जब अधिक कर वसूला जाने लगा तो गढ़िया राज्य के किसानों के द्वारा विद्रोह किया गया। जिसका नेतृत्व राजा उदयसिंह यादव ने किया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यहाँ से लोगों का पलायन होने लगा। क्योंकि राज परिवार में संकीर्ण सोच होने के कारण लोगों को प्रताड़ित किया जाने लगा। जिससे लोगों का पलायन बड़ी तेजीतेज़ी से हुआ। ओरयह एक नगर एक गांव में तवदीलतबदील हो गया। नगर में जो शिक्षा के केन्द्र थे वह नष्ट हो गये। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यहाँ पर भारत सरकार ने सन १९५० में एक माध्यमिक शालापाठशाला खोली जिससे लोगों में अपने अधिकारियोंअधिकारों को जानने लगेलगे। पर राज परिवार की संकीर्ण सोच ने शिक्षा का प्रसार रोक दिया। धीरे धीरे लोगों के अन्दर अपने अधिकारोअधिकारों का ज्ञान हुआ। ओर लोगों ने शिक्षा के लिये प्रयास किये। ओर सन २००६ में नगरिकोंनागरिकों के प्रयास से हाईस्कूल हुआ। अब जनता अपने अधिकारो को जाननेबना। लगी।
 
==सन्दर्भ==
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==बाहरी कड़ियाँ==
29,661

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