"गति के नियम": अवतरणों में अंतर

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== गैलिलीयो एवं न्यूटन के सिद्धांत ==
न्यूटन (सन्‌ १६४२-१७२७) ने अपने काल में प्रचलित गति संबंधी विचारों का समन्वय करते हुए गति के व्यापक सिद्धांत का प्रतिपादन किया। इस सिद्धांत का सौर परिवार के सभी पिंडों के लिए अनुप्रयोग करने पर ज्यौतिषज्योतिष तथ्यों का उच्च कोटि की यथार्थता तक समाधान हो गया और पार्थिव गति विज्ञान का आधार, सुदृढ़ हो गया। इसकी व्याख्या न्यूटन ने (सन्‌ १६८७) अपनी [[प्रिंसिपिया]] नामक पुस्तक में की है। पृथ्वी पर गिरते हुए पिडों के त्वरण के अनुरूप उसने आकाशीय पिंडों के बीच [[गुरूत्वाकर्षण]] की कल्पना कर उनमें भी त्वरणकात्वरण का समावेश कर दिया। इस गति सिद्धांत के अनुसार अवस्थितत्व द्वारा प्रदर्शित द्रव्यमान पिंड का मूलभूत गुण है। यह द्रव्यमान सदा अपरिवर्तित रहता है। आकाशीय पिंडो के द्रव्यमान की भी गणना इस प्रकार की गई कि इस सिद्धांत से उनकी गति ठीक ठीक मिल जाय। न्यूटन समय की अपनी माप को निरक्षेप माप मानता था। सामान्यतयासामान्यतः घड़ियों का उद्देश्य इसी माप को देना होता है।
 
गतिमापन के लिए न्यूटन को एक ऐसे आधार की आवश्यकता थी जिसके सापेक्ष गति की गणना की जा सके। आकाशीय पिडों के लिए यह आधार सौर परिवार का द्रव्यमानकेंद्र और वे दिशाएँ मान ली जाती हैं जो स्थिर तारों के सापेक्ष नहीं बदलतीं। पार्थिव गति के लिये आधार कुछ भी मान सकते हैं, किंतु गति की व्याख्या इस प्रकार की जाती है कि न्यूटन के नियम ठीक बैठते हैं। इस आधार को सामान्यतयासामान्यतः गैलिलीय आधार कहते हैं और इसके सापेक्ष गति को न्यूटन ''परम (निरक्षेप) गति'' कहता था। गैलिलीय आधार के सापेक्ष एक समान वेग से, बिना घूर्णन के गतिमान, कोई भी आधार गैलीलिय आधार ही है।
 
== गुरूत्वाकर्षण नियम ==