"टैंगो चार्ली (2005 फ़िल्म)" के अवतरणों में अंतर

छो
 
[[भारत]] और [[पाकिस्तान]] की उपजी तनाव [[कारगिल]] युद्ध में बदलती है, माइक अल्फा की प्लाटुन अपनी बटालियन समेत [[कश्मीर]] के मुख्य पुल की सुरक्षा की नियुक्ति मिलती है, आपातकालिन परिस्थितियों से निबटने के लिए वो इसका पूर्वाभ्यास भी करते है, माइक से तरुण को सख्त निर्देश मिलते है की जबतक कोई गेटपास के लिए तीन बार पासवर्ड पुछने पर जवाब न मिले तो उसे फौरन गोली मार दे ।
तरुण को पुल की प्रवेशद्वार पर चौकसी करने को मिलती है, जो उसके लिए बहुत नीरस काम था । पर इसी तरह एक रोज आतंकवादियों का लीडर सेना का उच्चाधिकरी (मुकेश तिवारी) के रूप में अपने लश्करों के साथ पुल पार करने की दर्ख्वासत करता है, जिसे बगैर फासवर्ड मिले वह जाने नहीं देता, तिलमिलाया ऑफिसर उसे काॅर्टमार्शल की धमकी देता है । जब उचित जवाब नहीं मिलता तो तरुण उसके एक सदस्य को गोली मार देता है । अब लीडर अपने जेहादियों को पुल को तबाह करने का आदेश देता है, तरुण उन पर गोलियाँ बरसाता है । तब तक माइक और उनकी पलटन बचाव रणनीति अपनाते हुए उन सबको मार गिराता है, लेकिन दुश्मनों की संख्या अधिक होने पर उसके सिपाही भी मारे जाते है, माइक भी लीडर के हाथों बुरी तरह घायल होता है, फिर भी रिइंफाॅर्समेंट टीम (अतिरिक्त दल) के आने तक उनको रोके रहता हैं । तब तक वह दुश्मनों को पीछे खदेड़ देता है, तरुण बदला लेने उनके पीछे जाता है ।है। रिइंफाॅर्समेंट टीम पहुँचने पर जख्मी माइक उनको रोककर पासवर्ड पुछता है, जिसका सही जवाब 'बरसात' होता है ।
माइक अल्फा उनको सैल्युट करता है लेकिन अधिक रक्तस्राव से वह बेहोश हो जाता है । तरुण आतंकवादियों का पीछा करता हुआ दूर से माइक को देख लेता है और उसकी मौत का बदला लेने आगे बढ़ता है । इस खोज में वह दुश्मनों को चुन-चुनकर मारता है, पीछा करते हुए वह उनके गुप्त बेसकैंप पहुंचता है और एक उन्हीं के बेहोश लड़ाके को रिमोट बम से बांध उसके अड्डे पर वापिस भेजता है, और सही मौके पर ट्रैगर ऑन कर बम विस्फोट से अंदर मौजुद समूचे दुश्मनों को खत्म कर देता है । तरुण अंदर की स्थिति का जायजा लेने दौरान लीडर द्वारा उस पर धोखे से वार होता है, तरुण उसे शुट कर मार देता है । जख्मी तरुण बाहर सारी घटनाओं को डायरी में दर्ज करने बाद बेहोश हो जाता है ।
अगले दिन खोजी हेलिकॉप्टर के पायलटों द्वारा तरुण मिलता है, जैसे फिल्म की शुरुआती दृश्यों में दिखाया गया था, पायलट उनको स्थानीय डाॅक्टर की सहायता से उसकी जान बचा लेते है ।
तरुण को बचाने के लिए पायलटों को पुरस्कार मिलता है तो तरुण और उसका शहीद परामर्शी दोस्त मुहम्मद अली की साहसिक सेवा के रुप में अशोक चक्र मिलता है ।
फिल्म के अंतिम वाक्य में कहा जाता है कि 'जंग किसी भी सभ्यता का अंतिम पड़ाव है, जंग बेमतलब है और जिंदगी बहुत कीमती ।'
 
== मुख्य कलाकार ==
1,068

सम्पादन